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IITH: भारत नैतिक और समानता पर आधारित विज्ञान में विश्वास रखता है, वैज्ञानिक सम्मेलन में बोले धर्मेंद्र प्रधान

Tue, 10 Jun 2025 07:27 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

IITH: केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आईआईटी हैदराबाद में कहा कि भारत ऐसा विज्ञान चाहता है जो सहानुभूतिपूर्ण, नैतिक और समान हो। उन्होंने वैश्विक सहयोग, साझेदारी और मानव-केंद्रित विकास पर जोर दिया। सम्मेलन में 60 देशों के वैज्ञानिक शामिल हुए।
 
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Dharmendra Pradhan - फोटो : X (@dpradhanbjp)
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विस्तार
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Dharmendra Pradhan: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि भारत ऐसा विज्ञान चाहता है जो सहानुभूतिपूर्ण, नैतिक और सबके लिए समान हो। प्रधान हैदराबाद स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT Hyderabad) में आयोजित ग्लोबल यंग साइंटिस्ट्स कॉन्फ्रेंस और ग्लोबल यंग एकेडमी की वार्षिक आम बैठक को संबोधित कर रहे थे।

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इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत के लिए 'वसुधैव कुटुंबकम' - एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन है।

उन्होंने कहा, "हम मानते हैं कि विज्ञान को साझा किया जाना चाहिए और भविष्य का निर्माण पेटेंट नहीं, बल्कि साझेदारी के माध्यम से होना चाहिए।"

मंत्री ने बताया कि भारत के वैश्विक प्रयास इन्हीं मूल्यों पर आधारित हैं। उन्होंने इंटरनेशनल सोलर एलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, मिशन LiFE, और इंडिया साइंस एंड रिसर्च फेलोशिप जैसी पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि ये सभी विज्ञान के माध्यम से भारत की वैश्विक मित्रता की सोच को दर्शाते हैं।

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यह साथ मिलकर कमजोरों के कल्याण के लिए काम करने का समय: प्रधान

प्रधान ने कहा कि यह समय वैज्ञानिकों, नवप्रवर्तकों और नीति निर्माताओं के साथ मिलकर काम करने और ऐसे तंत्र व समाधान बनाने का है, जो सबसे कमजोर लोगों को सशक्त बना सकें।

उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे एक उद्देश्य और सहानुभूति की भावना के साथ मिलकर काम करें, ताकि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सके और मानव-केंद्रित विकास को आगे बढ़ाया जा सके।
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