77th Independence Day: भारत का एक समृद्ध और विविध इतिहास रहा है, जो संघर्षों से भरा था। 200 सालों तक भारत ने खुद को ब्रिटिश राज की बेड़ियों से मुक्त करने के लिए संघर्ष किया, जिससे स्वतंत्रता की लड़ाई लंबी चली। इस बीच कुछ प्रमुख घटनाओं ने ब्रिटिश राजशाही को झकझोर कर भी रख दिया था। स्वतंत्रता दिवस के इस शुभ मौके पर आइए स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख घटनाओं पर एक नजर डालते हैं, जो परीक्षा के नजरिए से भी काफी महत्वपूर्ण हैं।
यह भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम था, जिसे सिपाही विद्रोह के नाम से भी जाना जाता है, पहली बार था जब भारतीय ब्रिटिश राज के खिलाफ एकजुट हुए थे। इस विद्रोह के कारण 1858 में भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन भंग हो गया और कंपनी की शक्तियां ब्रिटिश क्राउन के पास चली गईं।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी। यह मुस्लिम लीग के साथ अग्रणी पार्टी बन गई और स्वतंत्रता संग्राम में देश का नेतृत्व किया।
1915 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे।
लखनऊ समझौता कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच एक समझौता था। इसमें मुहम्मद अली जिन्ना की सशक्त भूमिका थी। लीग और कांग्रेस दोनों के सदस्य के रूप में, उन्होंने दोनों दलों को इस बात पर सहमत कराया कि वे अंग्रेजों पर भारतीयों को अपना देश चलाने देने के लिए अधिक दबाव दें।
1917 में, गांधीजी ने चंपारण के किसानों के विद्रोह का नेतृत्व किया, जिन्हें नील की खेती करने के लिए मजबूर किया जा रहा था और उन्हें इसके लिए पर्याप्त मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा था।
1919 में, ब्रिटिश सरकार ने सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था। आदेश से अनजान, हजारों भारतीय बैसाखी का त्योहार मनाने के लिए 13 अप्रैल को अमृतसर के जलियांवाला बाग में एकत्र हुए। ब्रिगेडियर-जनरल डायर ने सैनिकों को बुलाकर उन लोगों पर गोलीबारी करने का आदेश दिया। अंग्रेजों के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस नरसंहार में 350 लोग मारे गए, लेकिन कांग्रेस का दावा है कि यह संख्या 1,000 तक थी।
1920 में महात्मा गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली और असहयोग आंदोलन शुरू किया। यह आंदोलन अहिंसक था और लोगों ने ब्रिटिश सामान नहीं खरीदा, स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्पियों का समर्थन किया और शराब की दुकानों पर धरना दिया। यह आंदोलन 1922 में समाप्त हो गया, जब चौरी चौरा पुलिस स्टेशन पर एक विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने 1929 के अधिवेशन में 19 दिसंबर, 1929 को पूर्ण स्वराज पारित किया। इसके बाद 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत की स्वतंत्रता की घोषणा की जिसे अंग्रेजों ने मान्यता नहीं दी।