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Hindi: आईआईटी की पढ़ाई हिंदी और स्थानीय भाषाओं में कराई जाए, संसदीय समिति ने की सिफारिश

Mon, 10 Oct 2022 05:38 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली

सार

राजभाषा संसदीय समिति के मुताबिक, ए श्रेणी के राज्यों में हिंदी को सम्मानजनक स्थान दिया जाना चाहिए और अंग्रेजी के उपयोग को वैकल्पिक बनाना चाहिए।
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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संसदीय समिति ने आईआईटी जैसे तकनीकी और गैर तकनीकी उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षा के माध्यम को लेकर सिफारिश की है। समिति ने सुझाव दिया है कि हिंदी भाषी राज्यों में आईआईटी की पढ़ाई हिंदी में और देश के अन्य राज्यों में स्थानीय भाषाओं में होना चाहिए। साथ ही यह भी सिफारिश की है कि हिंदी संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषाओं में से एक होनी चाहिए।

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पिछले महीने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पेश की गई 11वीं रिपोर्ट में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली राजभाषा संसदीय समिति ने सिफारिश की थी कि सभी राज्यों में स्थानीय भाषा को अंग्रेजी पर वरीयता देनी चाहिए। समिति के मुताबिक, ए श्रेणी के राज्यों में हिंदी को सम्मानजनक स्थान दिया जाना चाहिए और अंग्रेजी के उपयोग को वैकल्पिक बनाना चाहिए।

श्रेणी ए में उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, झारखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और अंडमान-निकोबार द्वीप राज्य व केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं। वहीं, श्रेणी बी में गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, चंडीगढ़, दमन और दीयू और दादरा और नागर हवेली राज्य व केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं, जबकि सी श्रेणी में शेष भारत के राज्य व केंद्रशासित प्रदेश हैं। 
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डीयू, बीएचयू में सिर्फ 20-30 फीसदी हो रहा हिंदी का प्रयोग
समिति के उपाध्यक्ष बीजद नेता भर्तृहरि महताब ने बताया कि समिति ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार सिफारिशें तैयार की हैं। महताब ने कहा कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों में हिंदी का केवल 20-30 प्रतिशत उपयोग किया जा रहा है, जबकि इसका उपयोग 100 प्रतिशत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, अंग्रेजी एक विदेशी भाषा है और हमें इस औपनिवेशिक प्रथा को खत्म करना चाहिए।

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