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आईआईटी की गिरती रैंकिंग में होगा सुधार

Mon, 17 Oct 2016 12:15 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर आईआईटी के मुख्यद्वार की तस्वीर
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शैक्षिक, शोध की गुणवत्ता और ग्लोबल एकेडमिक रैंकिंग में सुधार के उद्देश्य से आईआईटी काउंसिल ने पोस्ट डॉक्टरल फेलोशिप (पीडीएफ) स्कॉलर को पीएचडी कराने का अधिकार दे दिया है। ऐसा पहली बार हुआ। एक पीडीएफ स्कॉलर चार अभ्यर्थियों को पीएचडी करा सकेंगे।
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अभी तक शिक्षक (असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर) ही पीएचडी कराते हैं। काउंसिल का मानना है कि नई व्यवस्था से शिक्षकों की कमी पूरी की जा सकेगी। गुणवत्ता परक शोध भी होगा। इस सिलसिले में 20 अक्तूबर को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एक मीटिंग भी बुलाई है।

देश की 23 आईआईटी में शिक्षकों की कमी है। आईआईटी कानपुर में ही 200 से ज्यादा शिक्षक कम हैं। इसी वजह से ग्लोबल रैंकिंग में सुधार नहीं हो सका। दुनिया के टॉप-200 संस्थानों की सूची में एक भी आईआईटी  जगह नहीं बना सकी है। इसको देखते हुए ही आईआईटी काउंसिल ने शैक्षिक, शोध की गुणवत्ता में सुधार की पहल की।
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काउंसिल के मुताबिक पीडीएफ स्कॉलर और फैकल्टी के सदस्यों को अब एक-एक लाख रुपये की रिसर्च ग्रांट भी दी जाएगी। यह ग्रांट उन्हीं स्कॉलर या फिर फैकल्टी को मिलेगी, जिनके दो रिसर्च पेपर चर्चित जनरल में प्रकाशित होंगे। बता दें पीडीएफ स्कॉलर सीनियर रिसर्च स्कॉलर होते हैं। पीएचडी होल्डर ही पीडीएफ कर सकते हैं। 

दुनिया के किसी भी देश में रहकर रिसर्च करने वाले भारतीय मूल के युवाओं को चिह्नित किया जाएगा। इसके लिए 100 ग्लोबल इंस्टीट्यूट की सूची तैयार की गई है। इन युवाओं की मदद से मेडिकल, इंजीनियरिंग, पर्यावरण, बिजली और पानी सहित अन्य क्षेत्रों में रिसर्च की गुणवत्ता बढ़ाई जाएगी। 
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