IIT Guwahati: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने एक सस्ता और प्रभावी तरीका विकसित किया है, जिससे जीवित कोशिकाओं और पर्यावरण में हानिकारक धातुओं का पता लगाया जा सकता है। यह तकनीक बीमारी के निदान और पर्यावरण निगरानी को बेहतर बनाकर धातु विषाक्तता (metal toxicity) की पहचान और प्रबंधन में मदद कर सकती है।
शोधकर्ताओं ने पेरोव्स्काइट नैनोक्रिस्टल्स नामक विशेष सामग्री का इस्तेमाल किया है। ये नैनोक्रिस्टल्स बहुत छोटे होते हैं (एक बाल की मोटाई से लाख गुना छोटे) और रोशनी के साथ खास तरह से प्रतिक्रिया करते हैं। इन्हें कोशिकाओं में फ्लोरोसेंट (चमकदार) जांच के रूप में उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, पानी में जल्दी खराब होने की वजह से इनका उपयोग सीमित था।