समुद्रों में तेल का फैलाव पर्यावरणीय आपदा
आईआईटी गुवाहाटी के रसायन विभाग के प्रोफेसर गोपाल दास ने बताया कि समुद्रों में तेल का फैलाव दुनिया की सबसे बड़ी पर्यावरणीय आपदाओं में से एक है। इससे समुद्री जीव-जंतुओं की मौत होती है, तटरेखाओं को नुकसान पहुँचता है और उन पर निर्भर लोगों की आजीविका प्रभावित होती है।
2024 लगभग 10,000 टन तेल समुद्रों में फैला: रिपोर्ट
‘ऑयल टैंकर स्पिल स्टैटिस्टिक्स 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनिया भर में लगभग 10,000 टन तेल समुद्रों और महासागरों में फैल गया। तेल पानी की सतह पर बहुत तेजी से फैलता है, जिससे उसे साफ करना एक मुश्किल काम बन जाता है। इसे दूर करने के लिए रासायनिक पदार्थों से तेल सोखना या जलाना जैसे उपाय अपनाए जाते हैं, लेकिन इनसे द्वितीयक प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है।
फेज-सेलेक्टिव ऑर्गेनोजेलेटर हो सकता है समाधान
प्रोफेसर दास ने बताया, "इस समस्या का समाधान करने के लिए हमने एक विशेष प्रकार का पदार्थ तैयार किया है जिसे फेज-सेलेक्टिव ऑर्गेनोजेलेटर (PSOG) कहा जाता है। यह एक सुरक्षित पदार्थ है, जिसे खास तौर पर इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह खुद-ब-खुद एक संरचना बनाकर तेल को जेल में बदल दे। यह मिट्टी के तेल (केरोसिन) और डीजल जैसे तेलों को अपने अंदर खींच लेता है, ठीक वैसे ही जैसे साबुन के अणु पानी में खुद को व्यवस्थित कर लेते हैं।"
उन्होंने आगे बताया, "जब यह तेल को पकड़ लेता है, तो यह अर्ध-ठोस जेल बना देता है, जिसे आसानी से पानी को बिना नुकसान पहुंचाए हटा सकते हैं। हमारे बनाए गए PSOG की खासियत यह है कि यह केवल कुछ विशेष तेलों जैसे केरोसिन और डीजल की मौजूदगी में ही जेल बनाता है, जबकि बाकी सॉल्वेंट्स या तेलों पर इसका असर नहीं होता।"
इस तरह का चयनात्मक PSOG विभिन्न प्रकार के तेलों के मिश्रण से किसी खास तेल को अलग निकालने और पानी से वापस पाने में भी उपयोगी हो सकता है। प्रोफेसर दास के अनुसार, "यह शोध भविष्य में पानी की सफाई (वॉटर रेमिडिएशन) और ईंधन की मिलावट की पहचान के लिए PSOG के विकास की दिशा में एक नया रास्ता खोल सकता है। हमारे विकसित ऑर्गेनोजेल का एक और संभावित उपयोग केरोसिन की मिलावट पकड़ने में हो सकता है। भारत में, खासकर निम्न-आय वर्गों में, कभी-कभी केरोसिन को पेट्रोल के साथ मिलाया जाता है ताकि वाहनों या घरों में चलने वाले स्टोव का खर्च कम हो सके।"
उन्होंने कहा, "यह बहुत खतरनाक होता है क्योंकि ऐसा मिलावटी ईंधन अत्यधिक ज्वलनशील होता है और देश में कई केरोसिन स्टोव विस्फोटों का कारण बन चुका है। अब हमारी टीम इस शोध को आगे बढ़ाकर विभिन्न प्रकार की ईंधन मिलावट का पता लगाने की दिशा में काम कर रही है। साथ ही, हम जेल बनाने वाले अणु (gelator molecule) के डिजाइन और कार्यक्षमता में सुधार करके जांच प्रक्रिया की दक्षता बढ़ाने पर भी काम कर रहे हैं।"