स्थायी बुनियादी ढांचा प्रदान करने का प्रयास
साझेदारी पर बोलते हुए, आईआईटी, गुवाहाटी के निदेशक प्रोफेसर टीजी सीताराम ने कहा, आईआईटी इस क्षेत्र में संस्थानों के साथ विस्तृत नेटवर्क बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है ताकि गुणवत्ता ज्ञान-आधारित, कौशल विकास और तकनीकी विशेषज्ञता पूर्ण समग्र शिक्षा और सहायक स्थायी बुनियादी ढांचा प्रदान किया जा सके। इस परियोजना की संचालन समिति में सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रोफेसर शरद बी गोखले, रसायन विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रोफेसर गोपाल दास, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर संतोष कुमार द्विवेदी और प्रोफेसर चंदन महंत शामिल हैं।
पहले चरण में 416 किलोवाट बिजली उत्पन्न की
आईआईटी, गुवाहाटी के निदेशक प्रोफेसर टीजी सीताराम ने बताया कि ये सभी आईआईटी-गुवाहाटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग से हैं। प्रोफेसर गोखले के नेतृत्व वाली प्रोजेक्ट टीम में संस्थान के साथ-साथ एआईसीटीई के विशेषज्ञ भी शामिल हैं। परियोजना के पहले चरण के माध्यम से, कुल 416 किलोवाट बिजली उत्पन्न की गई है जो प्रयोगशालाओं, कार्यालयों और स्ट्रीट लाइट में निर्बाध रूप से उपयोग में लाने में मददगार साबित हो रही है।
दूसरे चरण में 33 नए संस्थान शामिल होंगे
पहले चरण में जलापूर्ति की गुणवत्ता में सुधार के लिए संस्थानों को सुविधाएं भी मुहैया कराई गई हैं। आईआईटी की ओर से कहा गया है कि पहले चरण की परियोजना इस महीने के अंत तक पूरी होने वाली है और दूसरे चरण का काम शुरू हो गया है। इसमें 33 नए संस्थान शामिल होंगे। जहां सौर और जल सुविधाओं के अलावा इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी। इस परियोजना के पहले चरण के दौरान, 27 संस्थानों को सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए 5.4 करोड़ रुपये और वाटर ट्रीटमेंट सुविधाओं के लिए 16 संस्थानों को 1.92 करोड़ रुपये की फंडिंग प्राप्त हुई थी।