आईआईटी दिल्ली ने कोविड-19 से बचाव के लिए लगे लॉकडाउन के दौरान बीटेक छात्रों को वार्षिक परीक्षा में अर्ली ग्रेजुएशन और रैगुलर ग्रेजुएशन का विकल्प दिया है। बीटेक (सामान्य) और माइनर डिग्री के अब छात्र अपनी इच्छानुसार परीक्षा के विकल्प चुन सकते हैं। इसे ग्रेजुएटिंग बैच 2020 पॉलिसी का नाम दिया गया है। इस पॉलिसी को सीनेट बैठक के बाद आईआईटी दिल्ली प्रबंधन से भी मंजूरी मिल गई है।
आईआईटी प्रबंधन ने सोमवार को सभी छात्रों को ईमेल के माध्यम से इस परीक्षा पॉलिसी की सूचना भेज दी है।आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर प्रो. वी रामगोपाल राव के मुताबिक, वैश्विक महामारी कोविड-19 के बचाव के चलते सभी शिक्षण संस्थान बंद है। ऐसे में जब छात्र घर जा चुके हैं तो उन्हें परीक्षा के लिए फिलहाल बुलाना जल्दबाजी होगा। इसीलिए छात्रों के समक्ष अर्ली ग्रेजुएशन और रैगुलर ग्रेजुएशन का विकल्प दिया जा रहा है। दो जुलाई से कैंपस को चरणवद्ध तरीके से खोलने की योजना बन रही है, हालांकि यह सब कोरोना हालात पर निर्भर होगा।
प्रो. राव के मुताबिक, बीटेक फाइनल ईयर के छात्र अर्ली ग्रेजुएशन और रैगुलर ग्रेजुएशन का विकल्प चुन सकते हैं। जिन छात्रों को जल्द डिग्री पूरी करनी है,वे अर्ली ग्रेजुएशन का विकल्प चुनकर जून के आखिर में ऑनलाइन परीक्षा दे सकते हैं।
जबकि रैगुलर ग्रेजुएशन का मतलब है कि जब भी देश में कोरोना से हालात ठीक होंगे तो कैंपस में आकर पुरानी प्रक्रिया के तहत लिखित परीक्षा देनी होगी। छात्रों को अपनी डिग्री पूरी करने के लिए कैंपस आने के लिए बार-बार यात्रा करने की जरूरत नहीं होगी। हमारा मकसद है कि डिग्री पूरी होने के बाद वे सिर्फ अपना सामान उठाने को ही आएं।
अर्ली ग्रेजुएशन में भी दो विकल्प:
अर्ली ग्रेजुएशन में भी छात्रों को दो विकल्प दिए जा रहे हैं। इसमें ऑडिट पास/फेल और क्रेडिट (ग्रेडिंग)का विकल्प है। ऑडिट पास/फेल में फैकल्टी या कोर्स इंचार्ज पहले के अस्समेंट व केडिट के आधार पर कटऑफ जारी करेगा। जबकि क्रेडिट (ग्रेडिंग) में कोर्स इंचार्ज ऑनलाइन टेस्ट, घर से परीक्षा, अस्समेंट, टेलीफोन से वाइवा आदि के माध्यम से क्रेडिट जारी करेगा। कटऑफ जारी करेगा।