IIT Bombay: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे (IIT Bombay) के छात्रों ने इसरो (ISRO) के चंद्रयान-2 से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल करते हुए चांद की सतह की रासायनिक संरचना को सफलतापूर्वक मैप किया है। यह उपलब्धि इसरो के यू आर राव सैटेलाइट सेंटर द्वारा अंतर-आईआईटी तकनीकी बैठक में दी गई एक चुनौती का हिस्सा थी।
चांद की सतह पर वातावरण न होने की वजह से वह लगातार सूर्य से आने वाली तेज एक्स-रे किरणों की चपेट में रहता है। जब ये किरणें सतह से टकराती हैं तो वहां मौजूद तत्व अपनी खास रोशनी (X-ray fluorescence) उत्सर्जित करते हैं। इसी रोशनी से वैज्ञानिक पता लगाते हैं कि चांद किन-किन तत्वों से बना है।
चंद्रमा की सतह को स्कैन कर किया डेटा इकट्ठा
चंद्रयान-2 पर लगे लार्ज एरिया सॉफ्ट एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर ने 100 किमी की ऊंचाई से पूरे चंद्रमा की सतह को स्कैन कर डेटा इकट्ठा किया। हालांकि, इस विशाल डेटा का बड़ा हिस्सा अब तक वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हुआ था। IIT बॉम्बे के छात्रों ने इसी डेटा से चांद की सतह की केमिस्ट्री का गहराई से विश्लेषण कर एक नई उपलब्धि हासिल की है।
टीम का नेतृत्व कर रहे छात्र रवि कुमार ने कहा कि इसरो के फ्लैगशिप मिशन चंद्रयान से मिले डेटा पर काम करना बेहद रोमांचक और प्रेरणादायी अनुभव रहा। यह भारत की स्पेस लिगेसी से जुड़ने जैसा अवसर था।
आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर वरुण भालेराव ने बताया कि छात्रों ने उन्नत खगोल-भौतिकी और डेटा विश्लेषण तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए जटिल X-ray स्पेक्ट्रा से महत्वपूर्ण जानकारी निकाली। वहीं IIT बॉम्बे के निदेशक शिरीष केदार ने कहा कि यह सफलता छात्रों की वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार की मिसाल है।
आईआईटी बॉम्बे के डिप्टी डायरेक्टर मिलिंद आत्रेय ने कहा कि राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर यह उपलब्धि इस बात का उदाहरण है कि भारत की युवा प्रतिभा किस तरह हमारे स्पेस प्रोग्राम को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।