क्या है उनका आरोप?
आशुतोष मिश्रा ने कहा है कि, वे कुलपति के लिए यूजीसी के मानदंडों की अनदेखी कर रहे हैं, जो पीएचडी करने के साथ प्रोफेसर के रूप में 10 से साल है।
आगे उन्होंने कहा, यूजीसी और उच्च शिक्षा मंत्रालय के साथ-साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से आग्रह किया कि वे इस कदम पर ध्यान दें और कुलपति पद की गरिमा को कम करने के इस तरह के कदम को रोकने का अनुरोध किया गया है। शैक्षणिक संस्थानों/विश्वविद्यालयों के मानकों को बनाए रखने के लिए योग्यता और अनुभव यूजीसी के मानदंडों के अनुसार होना चाहिए।
उन्होंने आशंका जताते हुए कहा, कि आईआईएमसी के कुलपति के लिए मानदंडों में बदलाव पर सदस्यों (48) द्वारा मतदान, सहमति, आपत्ति करने से परहेज कर रहा है या कर चुका है। इसके साथ ही अपनी सोसायटी के माध्यम से अनुमोदित करवा रहा है।