चयन के दौरान :
संस्थान चुनने के लिए आप तीन आधार बना सकते हैं। पहला ए श्रेणी के संस्थान जो काफी प्रतिष्ठित हैं, दूसरा बी श्रेणी के संस्थान जो कम लोकप्रिय हैं पर वहां पढ़ाई अच्छी होती है। तीसरी श्रेणी के संस्थान वे हैं जो ज्यादा लोकप्रिय भी नहीं हैं और पढ़ाई भी वहां औसत है। ए श्रेणी के संस्थानों के चयन में परेशानी नहीं होती, पर बी और सी श्रेणी के संस्थानों के चयन में थोड़ी सोच-समझ की जरूरत होती है। इसके लिए आप अपने बजट और जरूरतों में तालमेल बना सकते हैं। किसी संस्थान की रैंकिंग करते समय इन्फ्रॉस्ट्रक्चर, प्लेसमेंट, विदेशी यूनिवर्सिटी से संबद्धता, फैकल्टी व इंडस्ट्रियल इंटरेक्शन आदि का ध्यान रखा जा सकता है।
सीनियर स्टूडेंट्स से करें बात :
किसी संस्थान में शिक्षा की गुणवत्ता व माहौल परखने के लिए उस संस्थान के सीनियर छात्रों से बात करके आप वहां माहौल, फैकल्टी, प्लेसमेंट आदि के बारे में जान सकते हैं।
जांचें सत्यता :
संस्थान को चुनते समय उसकी मान्यता के बारे में जानकारी हासिल करें। इसके लिए बेहतर होगा कि आप संबंधित संस्थान को मान्यता देने वाली अधिकृत शीर्ष संस्था से सीधे या इंटरनेट से जानकारी हासिल करें। विदेशी संस्थानों से संबद्धता के दावे को भी जांच-परख लेना आपके लिए बेहतर होगा।
पैरामीटर्स :
- क्या कहते हैं संस्थान के छात्र
- कैसा हैं उद्योगों के साथ संस्थान का संबंध?
- क्या कहता है अब तक का प्लेसमेंट रिकॉर्ड?
- कैसा है फैकल्टी मैंबर्स का प्रोफाइल?
- कैसी हैं संस्थान की बुनियादी सुविधाएं?
किसी सामान को खरीदते समय जब सावधानी रखी जाती है तो ऐसी सावधानी संस्थान का चयन करते समय क्यों नहीं? अपनी जरूरतों से तालमेल बिठाते हुए एक सही संस्थान का चयन करना वह अहम फैसला है, जो करियर प्लानिंग पर दूरगामी असर डालता है।
संस्थान की शिक्षण सुविधाओं को पहले जरूर परखें :
वास्तव में नए पाठ्यक्रमों के ढेर और नए शिक्षण संस्थानों की बहुलयता के बीच उनमे श्रेष्ठ चयन की दृष्टि से बच्चे असमंजस की स्थिति में होते हैं, कई शिक्षण संस्थानों ने नए-नए पाठ्यक्रम शुरू कर दिए हैं, लेकिन अध्यापन के लिए फैकल्टी की कमी है, किसी भी शिक्षण संस्थान में प्रवेश लेने से पहले आप उस संस्थान की पूरी जांच पड़ताल कर लें, हो सकें तो उस संस्थान में पढ़ रहे छात्रों से मिलकर उस संस्थान की शिक्षण सुविधाओं एवं प्लेसमेंट की जानकारी प्राप्त कर लें, यह बहुत जरूरी है कि आकर्षक विज्ञापन पर आधारित संस्थान में दाखिला लेने से पूर्व उनके पाठ्यक्रमों एवं अन्य बातों की जानकारी भली-भांति प्राप्त कर लें ।
इंडस्ट्रियल इंटरेक्शन :
प्रोफेशनल कोर्सेज के मामलों में ध्यान रखें कि उस संस्थान का इंडस्ट्रीज के साथ किस प्रकार का तालमेल हैं और उनके कोर्स व्यावहारिक है या नहीं। विभिन्न संस्थान अपने यहां कोर्सेज के लिए इंडस्ट्री के प्रतिष्ठित लोगों को आमंत्रित करते हैं और औद्योगिक जरूरतों के मुताबिक अपने कोर्सेज में समायोजन करते हैं। इस प्रक्रिया में संस्थान अपने साथ स्टूडेंट्स की भी ब्रांडिंग करते हैं, जिसका फायदा अंततः स्टूडेंट्स को मिलता है।
इन्फ्रास्ट्रक्चरल फैसिलिटी :
संस्थान के चयन में इन्फ्रास्ट्रक्चर भी काफी महत्व रखता है। इसमें बिल्डिंग, कैंपस, क्लासरूम, लाइब्रेरी, लैब, हॉस्टल सुविधा आदि को शामिल किया जा सकता है। निसंदेह किसी संस्थान का इन्फ्रास्ट्रक्चर शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाता है, लेकिन रैंकिंग के लिए यही एकमात्र आधार न बनाएं। फैकल्टी के तो बेहतर होगा ताकि भविष्य में पछताना न पड़ेप्रोफाइल और उसकी शिक्षा को भी परखें।
प्लेसमेंट :
प्रायः संस्थानों द्वारा प्लेसमेंट के दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। हालांकि प्लेसमेंट स्टूडेंट के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर है। क्योंकि प्रोफेशनल कोर्स की पढ़ाई का महत्वपूर्ण लक्ष्य आखिर अच्छी नौकरी पाना होता है। इसके लिए आप संस्थान के पिछले वर्षों के प्लेसमेंट रिकॉर्ड की जानकारी लें।