यह मेडिकल साइंस की एक ब्रांच है। किसी नई संक्रामक बीमारी की खोज होती है तो एपिडेयोलॉजिस्ट्स मेडिकल इसे बारे में सबकुछ निकाले में जुट जाते हैं। इनका काम भी वैज्ञानिकों कजैसा ही होता है। इन्हें रोज जासूस कहना गलती नहीं होगा। रोग की जड़ तक पहुंतना इन्हीं के काम के अंतर्गत आता है। इसकेअलावा ये उस बीमारी को रोकने के लिए उपायों का पता लगाते हैं।
कैसे करते हैं शोध-
एपिडेमियोलॉजिस्ट अपने तय किए गए क्षेत्र में महामारी के बारे में कैसे और क्यों जैसे प्रश्नो का पता लगाते हैं।
ग्रेजुएशन के लिए कोर्स की जानकारी-
- एमबीबीएस/पब्लिक हेल्थ
- फिजियोथैरेपी
- नर्सिंग
- वेटरिनरी साइंस
मास्टर डिग्री के लिए कोर्स
- पब्लिक हेल्थ
- एपिडेमियोलॉजी
संस्थान के नाम-
- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी, चेन्नई
- नेशनल सेंटर फॉर कम्युनिकेबल डिसीज, दिल्ली
- स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट ऑफ कम्यूनिटी मेडिसन पीजीआई,चंड़ीगढ़
- पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया, हैदराबाद
- पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया, गांधीनगर
- पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया, दिल्ली
- सीएम-वेल्लोर
कैसे लें दाखिले-
CET- कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के जरिये आप स्टेट लेवल के कॉलेजों में मेडिकल के कोर्स में दाखिला ले सकते हैं।
TISS-NET- इस परीक्षा के जरिये आप टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस में एपिडेमियोलॉजी प्रोग्राम का गेटवे बन सकता है।
कहां मिलेगी नौकरी-
- फार्मास्यूटिकल के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग इंटस्ट्री तक नौकरी मलि सकती है।
- एकेडमिक क्षेत्र में एक अच्छा खासा नाम मिल कमा सकते हैं
- इसके साथ ही आप रिसर्च स्कॉलर के तौर पर भी काम कर सकते हैं।
- इसके अलावा आप एनजीओ, कम्यूनिटी हेल्थ, पब्लिक हेल्थ एंड वेल्फेयर डिपार्टमेंट में योगदान दे सकते हैं।
- आप सीडीसी, एफडीए, एनआईएच. डब्ल्यूएचओ, वर्ल्ड बैंक आदि में काम कर सककते हैं।