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जानें कैसी है राष्ट्रपति भवन की रसोई? पांच सितारा होटलों को भी देती है मात

Thu, 27 Feb 2020 03:58 PM IST
Trainee Trainee एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के दौरान भारतीय राष्ट्रपति भवन में शानदार डिनर का आयोजन किया, जिसमें एक से बढ़कर एक व्यंजन परोसे गए। आपको बता दें कि राष्ट्रपति भवन का मॉर्डन किचन अपनी डिशेज और स्वाद के मामले में फाइव स्टार होटलों को भी मात देता है।

जब भी यहां कोई बड़ा अतिथि आता है, तो उसकी तैयारियां पहले से ही शुरू हो जाती हैं और यहां सारे काम बहुत व्यवस्थित तरीके से किए जाते हैं।

यहां हम आपको बता रहे हैं कि ये किचन कैसे काम करता है? कैसे किसी भोज की तैयारी होती है? इन सभी सवालों के जवाब आपको आगे की स्लाइड में मिल जाएंगे। 
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  • राष्ट्रपति भवन में दो किचन हैं- एक राष्ट्रपति का निजी किचन है और दूसरा किचन भवन में वाले कार्यक्रमों (कॉन्फ्रेस, पुरस्कार वितरण आदि) में खानपान की जिम्मेदारी संभालता है।
  • पहला किचन आकार में छोटा है और दूसरा किचन बड़ा। इसलिए पहले किचन का स्टाफ छोटा है और दूसरे किचन में ज्यादा लोग काम करते हैं।
  • इस बड़े किचन की मुख्य जिम्मेदारी संभालते हैे सीनियर एक्जीक्यूटिव शेफ मोंटी सैनी।
  • आपको बता दें कि बड़ा किचन में अत्याधुनिक उपकरण और सुविधाएं हैं।
  • इस किचन में मोंटी सैनी की अगुआई में लगभग 45 लोगों की बड़ी टीम काम करती है।
  • जब पिछली बार अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को राष्ट्रपति भवन में भोज के लिए आमंत्रित किया गया था, तब उन्होंने भी यहां के पकवानों की बहुत तारीफ की थी।
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बड़े किचन की खासियतें...

  • राष्ट्रपति भवन के बड़ा किचन कई भागों में बटा है। इनमें मुख्य किचन, बेकर्स, स्वीट सेक्शन, कॉन्टिनेटल और ट्रेनिंग एरिया शामिल हैं।
  • पूरा किचन वातानुकूलित है। किचन की सफाई के लिए एक खास टीम तैयार रहती है जो हमेशा हाईजीन के अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार किचन को साफ रखती है।
  • इसी किचन से राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक समारोहों, मीटिंग्स, रिसेप्शन और कॉन्फ्रेंस में खानपान की व्यवस्था की जाती है।

80 के दशक के बाद किचन हुआ अत्याधुनिक...

  • 80 के दशक में राष्ट्रपति भवन के किचन ने आधुनिक रूप लेना शुरू किया।
  • 90 के दशक में यह किचन फाइव स्टार होटलों के व्यंजनों को मात देने लगा। लेकिन आज यह दुनिया के किसी भी बेहतरीन होटल के किचनों को टक्कर देता है। 

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समय पर होते हैं रसोई के सभी काम

  • राष्ट्रपति भवन की रसोई में काम के लिए समयसीमा तय होती है। कार्या समय से हो जाए, ये सुनिश्चित करने के लिए ये समयसीमा बनाई गई है ।
  • रसोई में टीम रोजाना 15-16 घंटे काम करती है।

अतिथियों के लिए खास इंतजाम... 

  • किसी भी समारोह के लिए तैयारियां कई दिन पहले शुरू हो जाती हैं। मेन्यू की प्लानिंग पर सीनियर एग्जीक्यूटिव शेफ इस पर अपनी मुहर लगाते हैं।
  • मेन्यू बन जाने के बाद सामग्रियों की लिस्ट स्टोर में भेज दी जाती है, जिसमें खानपान के सामान से क्रॉकरी, कांच के सामान आदि सभी आवश्यक चीजें भी शामिल होती हैं।
  • दावत का मेन्यू सुनिश्चित होने के बाद राष्ट्रपति भवन की ही प्रिंटिग प्रेस इसे छापती है। इसकी डिजाइनिंग भी एक डिजाइन विभाग द्वारा करवाई जाती है।
  • राष्ट्रपति भवन में किसी भी भोज से करीब छह से आठ घंटे पहले टेबल तैयार कर ली जाती है। उस पर क्रॉकरी सज चुकी होती है। टेबल पर फूलों की सजावट होती है।
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यहां के समोसे और कचौड़ियों का स्वाद है बेहद खास   

  • राष्ट्रपति भवन में स्नैक्स विशेषज्ञ केक, ब्रेड्स, पिज्जा, डोनट्स, पेस्ट्री, बर्गर आदि का विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए जाते हैं, तो मिठाईयों के विशेषज्ञ जलेबी, गुलाब जामुन, इमरती, बंगाली मिठाइयां आदि बनाते है।
  • जिन लोगों ने राष्ट्रपति भवन के समारोहों में शिरकत की है, वे लोग बताते हैं कि यहां के समोसे, ढोकला और कचौड़ियों बेहद स्वादिष्ट होते हैं।

अवधी व्यंजनों का भी बोलबाला

  • इसके अलावा मुर्ग दरबारी, गोश्त थाखनी, दाल रायसीना, कोफ्ता, आलू बुखारा कुछ ऐसे व्यंजन हैं, जिसमें यहां की रसोई का जवाब नहीं।
  • यहां परोसे जाने वाले जायकेदार अवधी व्यंजनों में दाल रायसीना के स्वाद का भी कोई मुकाबला नही है।
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कैसे तय होते हैं व्यंजन

  • सभी डिशेज अलग प्रोग्राम और उनके नेचर के साथ मेहमानों की पसंद के अनुसार तय की जाती हैं। अगर कोई खास मेहमान आ रहा हो तो तैयारी बहुत पहले ही शुरू हो जाती है।

क्या होती है किचन की प्राथमिकता

  • राष्ट्रपति भवन का किचन यह कोशिश करता है कि वो डिनर या लंच में भारतीय और कॉन्टिनेंटल व्यंजनों को परोसे। इसकी शुरूआत तब से हुई, जब 1929 में राष्ट्रपति भवन बनकर तैयार हुआ था।
  • हालांकि तब इसे वायसराय हाउस कहा जाता था। अंग्रेज वायसराय यहां रहा करता था।
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rastrapati bhawan guest - फोटो : social media

सूप, डेजर्ट और चाय-कॉफी

  • आमतौर पर भोजन में कई तरह के सूप, वेज और नॉन वेज व्यंजनों के साथ ही कई तरह के डेजर्ट होते हैं।
  • इसके बाद चाय, कॉफी और मेहमानों की विदाई के समय उन्हें पान और माउथ फ्रेशनर खाने को दिया जाता है।
  • खाने के दौरान नौसेना का बैंड बजता है। इसके संगीत का कंपोजिशन हिन्दी, अंग्रेजी और संबंधित देश की सभ्यता के अनुसार होता है।

छोटा किचन...

  • राष्ट्रपति भवन का छोटा किचन दरअसल तत्कालीन राष्ट्रपति का निजी किचन होता है।
  • जिसमें राष्ट्रपति, उनके परिवार और निजी मेहमानों के सिए व्यंजन बनाए जाते हैं।
  • जब प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति थे तब उनके निजी किचन के मेन्यू में कई तरह के बंगाली व्यंजन और मिठाइयां बनाए जाते थे। अब नए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी इसमें अपनी पसंद के अनुसार बदलाव कराया है।
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