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E=mc² याद है?: जब एक नियम ने बदली द्रव्यमान और ऊर्जा की समझ, आज ही पेश हुआ था आइंस्टाइन का यह मशहूर समीकरण

Sun, 27 Sep 2026 06:46 AM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

E=mc²... विज्ञान की दुनिया का शायद सबसे चर्चित समीकरण। क्या आप जानते हैं अल्बर्ट आइंस्टाइन ने यह समीकरण आज ही के दिन पेश किया था? देखने में यह समीकरण जितना छोटा है, उतना ही महत्वपूर्ण अर्थ अपने भीतर समाए हुए है। परीक्षा के लिए लिहाज से भी यह सिद्धांत बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में आइए जानते हैं कि आइंस्टाइन ने यह नियम कब-कैसे और कौन से साल पेश किया था?
 
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27 September In History - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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27 September In History: E=mc² को देखते ही अल्बर्ट आइंस्टाइन और सापेक्षता का सिद्धांत याद आता है। लेकिन इस छोटे से समीकरण के पीछे एक बहुत बड़ा विचार छिपा है। यह विचार कहता है कि द्रव्यमान और ऊर्जा एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। 27 सितंबर 1905 को अल्बर्ट आइंस्टाइन का द्रव्यमान और ऊर्जा के संबंध पर शोध-पत्र प्राप्त हुआ था। इसी काम ने E=mc² के प्रसिद्ध संबंध को सामने रखा।

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ऊर्जा-द्रव्यमान नियम कब पेश किया गया था?

27 सितंबर 1905 को जर्मन मूल के भौतिक विज्ञानी अल्बर्ट आइंस्टाइन का एक शोध-पत्र Annalen der Physik के संपादक के पास पहुंचा था। इसका शीर्षक था- Does the Inertia of a Body Depend Upon Its Energy-Content? यानी क्या किसी पिंड का जड़त्व उसकी ऊर्जा-सामग्री पर निर्भर करता है? इसी छोटे से शोध-पत्र में आइंस्टाइन ने द्रव्यमान और ऊर्जा के संबंध को सामने रखा।

क्या है E=mc²?

E = mc² को बहुत आसान भाषा में समझें तो यहां-

E = ऊर्जा
m = द्रव्यमान
c = निर्वात में प्रकाश की गति

अंतरराष्ट्रीय इकाई प्रणाली के अनुसार निर्वात में प्रकाश की गति 299,792,458 मीटर प्रति सेकंड है। अब ध्यान दीजिए कि समीकरण में इस गति का वर्ग यानी c² है। यानी यह नियम कहता है कि बहुत छोटे द्रव्यमान के बराबर ऊर्जा की मात्रा भी बहुत बड़ी हो सकती है।

1905 में आइंस्टाइन ने क्या बताया था?

1905 आइंस्टाइन के वैज्ञानिक जीवन का बेहद महत्वपूर्ण साल था। इस साल उन्होंने भौतिकी से जुड़े चार महत्वपूर्ण शोध-पत्र प्रकाशित किए। इन्हीं में विशेष सापेक्षता से जुड़े काम और द्रव्यमान-ऊर्जा संबंध वाला शोध-पत्र शामिल था।

27 सितंबर 1905 वाले शोध-पत्र में आइंस्टाइन ने यह निष्कर्ष निकाला कि यदि कोई पिंड ऊर्जा विकिरण के रूप में बाहर निकालता है तो उसके द्रव्यमान में भी कमी आती है। उनके मूल निष्कर्ष को आज हम सरल रूप में E=mc² के रूप में जानते हैं।

आइंस्टाइन के उस मूल शोध-पत्र में आज के पाठ्यपुस्तक वाले रूप में “E=mc²” समीकरण नहीं लिखा था। उन्होंने द्रव्यमान और ऊर्जा के संबंध को अपने निष्कर्ष के रूप में बताया था। प्रसिद्ध समीकरण उसी संबंध को संक्षिप्त रूप में व्यक्त करता है।
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27 सितंबर 1905 का दिन क्यों याद किया जाता है?

1905 में आइंस्टाइन ने भौतिकी के कई पुराने सवालों को नए तरीके से देखा। उनके द्रव्यमान-ऊर्जा संबंध वाले शोध-पत्र ने यह दिखाया कि किसी पिंड की ऊर्जा-सामग्री और उसका द्रव्यमान आपस में जुड़े हैं।

आज E=mc² आधुनिक भौतिकी के सबसे प्रसिद्ध समीकरणों में से एक है। इसका इस्तेमाल परमाणु भौतिकी से लेकर तारों में होने वाली प्रक्रियाओं को समझने तक कई क्षेत्रों में किया जाता है।
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