क्यों विदेश भेजे जाएंगे एमबीबीएस छात्र और शिक्षक?
- मुख्यमंत्री के मुताबिक, विदेशी दौरों के जरिए मेडिकल छात्र और डॉक्टर दूसरे देशों की स्वास्थ्य व्यवस्था और आधुनिक तकनीक को करीब से समझ सकेंगे।
- इससे उन्हें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इस्तेमाल हो रही चिकित्सा तकनीकों और उन्नत उपचार प्रक्रियाओं की जानकारी मिलेगी।
सुक्खू ने यह बात मंडी जिले के नेरचौक स्थित श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एमआरआई सुविधा और सिम्युलेटर मशीनों से लैस टर्शियरी केयर कैंसर सेंटर के उद्घाटन के बाद कही।
मेडिकल कॉलेजों के किन विभागों को मजबूत किया जाएगा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हर मेडिकल कॉलेज में कम से कम दो या तीन विभागों को प्राथमिकता के आधार पर मजबूत करने पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा, “सरकार का उद्देश्य विशेष स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के भीतर ही मरीजों के लिए अधिक उपचार सुविधाएं उपलब्ध हों।”
नेरचौक मेडिकल कॉलेज में क्या नई सुविधाएं शुरू हुईं?
मुख्यमंत्री ने नेरचौक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एमआरआई सुविधा और सिम्युलेटर मशीनों से लैस तृतीयक देखभाल कैंसर केंद्र का उद्घाटन किया। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज में पीईटी स्कैन ब्लॉक के निर्माण की आधारशिला भी रखी गई।
सुक्खू ने कहा, “सरकार राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए काम कर रही है, ताकि लोगों को लंबी दूरी की यात्रा किए बिना अपने घर के नजदीक विशेष स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।”
एक नमूने से कई जांच कैसे होंगी?
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार सभी मेडिकल कॉलेजों में स्वचालित प्रयोगशालाएं स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि इन प्रयोगशालाओं की मदद से एक ही नमूने का इस्तेमाल करके कई जांच की जा सकेंगी।
उन्होंने कहा, “इस योजना के तहत सभी मेडिकल कॉलेजों में स्वचालित प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं, जिससे एक ही नमूने का इस्तेमाल करके कई जांच की जा सकेंगी।”