वलपराई के चिन्नाकल्लार का यह स्कूल राज्य के आदि द्रविड़ार और आदिवासी कल्याण विभाग द्वारा चलाया जाता है। इस स्कूल को वर्ष 1943 में चाय बागान में काम करने वाले मजदूरों के बच्चों के लिए खोला गया था। धीरे-धीरे मजदूर दूसरे इलाकों में पलायन करते गए और स्कूल बंद करना पड़ा।
खबरों के अनुसार, बच्चे का नाम शिवा है। उसकी मां राजेश्वरी घर के पास किसी स्कूल में पहली क्लास में अपने 6 साल के बेटे शिवा का एडमिशन कराना चाहती थी। लेकिन पास का ये स्कूल बंद था। लेकिन मजदूरी करने वाली राजेश्वरी ने हार नहीं मानी। उसने अधिकारियों के पास स्कूल खोलने की अपील की। कुछ ही दिनों में उसकी यह अपील स्वीकार कर ली गई। अब शिवा की देखरेख और उसे पढ़ाने की जिम्मेदारी स्कूल के प्रिंसिपल को दी गई है।
बता दें कि इस स्कूल से 2017-18 में एक बच्ची ने पढ़ाई की थी। उसके बाद कोई दाखिला नहीं होने से स्कूल बंद हो गया। प्रिंसिपल और शिक्षकों का ट्रांसफर दूसरे स्कूलों में कर दिया गया।