नियमित प्रशिक्षण व अभ्यास कराने का भी दिया सुझाव
शिक्षा मंत्रालय ने स्थानीय अधिकारियों जैसे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, फायर सर्विस, पुलिस और मेडिकल एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाने और नियमित प्रशिक्षण व अभ्यास कराने का भी सुझाव दिया है।
सिर्फ शारीरिक सुरक्षा ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक भलाई पर भी जोर देते हुए मंत्रालय ने स्कूलों में परामर्श सेवाओं, सहकर्मी सहायता प्रणालियों और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने की बात कही है।
किसी भी जोखिमपूर्ण स्थिति, दुर्घटना या बच्चे से जुड़ी खतरे की घटना को 24 घंटे के भीतर संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के प्राधिकारी को रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा। देरी या लापरवाही की स्थिति में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
असुरक्षा की सूचना देने के लिए किया प्रोत्साहित
मंत्रालय ने अभिभावकों, समुदाय के नेताओं और स्थानीय संस्थाओं को भी सतर्क रहने और स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों या बच्चों के परिवहन में असुरक्षा की सूचना देने के लिए प्रोत्साहित किया है।
अधिकारी ने कहा, “शिक्षा विभाग, स्कूल बोर्ड और संबद्ध प्राधिकारी बिना विलंब इन सुरक्षा उपायों को लागू करने के लिए तत्काल कार्रवाई करें।”