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Google Doodle: विज्ञान में पीएचडी करने वाली पहली भारतीय महिला, जानिए कौन हैं कमला सोहोनी

Sun, 18 Jun 2023 02:33 PM IST
सौरभ पांडेय एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Google Doodle: गूगल ने डूडल के जरिए भारतीय बायोकेमिस्ट डॉ कमला सोहोनी को उनके 112वें जन्मदिन पर श्रद्धांजलि दी है। जिन्होंने विज्ञान में महिलाओं के लिए मार्ग प्रशस्त किया।
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Google Doodle kamala sohonie - फोटो : GOOGLE
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विस्तार
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Google Doodle kamala sohonie: गूगल ने डूडल के जरिए भारतीय बायोकेमिस्ट डॉ कमला सोहोनी को उनके 112वें जन्मदिन पर श्रद्धांजलि दी है। Google डूडल ने भारतीय वैज्ञानिक कमला सोहोनी को उनके 112वें जन्मदिन पर एक रंगीन एनिमेटेड चित्रण के रूप में दिखाया है, जिसमें विज्ञान के क्षेत्र में उनके कार्यों को दर्शाने के लिए माइक्रोस्कोप, वैज्ञानिक स्लाइड और उनके आसपास के पौधों के चित्र हैं। गूगल डूडल के जरिए उनके जीवन का जश्न मना रहा है।आइए जानते हैं कमला सोहोनी के बारे में...

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साल 1911 में आज ही के दिन मध्य प्रदेश के इंदौर में जन्मीं डॉ. सोहोनी सम्मानित रसायनज्ञों के परिवार से थीं। अपने पिता और चाचा के नक्शे कदम पर चलने के लिए दृढ़ संकल्पित, उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान और भौतिकी में अपनी पढ़ाई की। वैज्ञानिक कमला सोहोनी प्रतिष्ठित भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर (IISc) में प्रवेश पाने वाली भारत की पहली महिला थीं, जिसे देश का सबसे अच्छा संस्थान माना जाता है। सोहोनी पीएचडी करने वाली पहली भारतीय महिला भी बनीं। 

भारतीय विज्ञान में उनके उल्लेखनीय कार्यों और उपलब्धि का जश्न मनाते हुए, Google ने लिखा, “आज का डूडल भारतीय बायोकेमिस्ट कमला सोहोनी का जश्न मनाता है, जो वैज्ञानिक अनुशासन में पीएचडी प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला थीं, जिन्होंने महिलाओं के लिए एसटीईएम में डिग्री हासिल करने का मार्ग प्रशस्त किया। ”

डॉ कमला सोहोनी भारत में सभी महिलाओं के लिए अग्रणी बन गईं और उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में लैंगिक पूर्वाग्रह को कम करते हुए एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया। उन्हें IISc बैंगलोर में स्वीकार कर लिया गया, लेकिन अधिकारियों को उनकी क्षमताओं पर संदेह था, क्योंकि वह एक महिला थीं। उन्होंने बाद में यह पता लगाना शुरू किया कि कैसे फलियों में विभिन्न प्रोटीन बच्चों को पोषण प्रदान कर सकते हैं।

डॉ कमला सोहोनी का मील का पत्थर ताड़ के अमृत का उपयोग करके एक किफायती आहार और पोषण पूरक विकसित करना था। इस पेय को नीरा कहा जाता था, और यह विटामिन सी और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर था, जो गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों को पोषण प्रदान करता था।

डॉ. सोहोनी की उपलब्धि 

डॉ. सोहोनी ने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में रिसर्च स्कॉलरशिप भी हासिल की। डॉ सोहोनी ने ऊर्जा उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण एंजाइम साइटोक्रोम सी की खोज की और पाया कि यह सभी पौधों की कोशिकाओं में मौजूद था। केवल 14 महीनों में, उन्होंने इस खोज के बारे में अपनी थीसिस पूरी की और पीएचडी हासिल की। जब वह भारत लौटीं, तो डॉ. सोहोनी ने कुछ खाद्य पदार्थों के लाभों का अध्ययन करना जारी रखा और पाम अमृत से बने एक किफायती आहार पूरक को विकसित करने में मदद की। नीरा नामक यह पौष्टिक पेय विटामिन सी का एक अच्छा स्रोत है और कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के लिए सिद्ध हुआ है।

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डॉ सोहोनी को नीरा पर उनके काम के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह बॉम्बे में रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की पहली महिला निदेशक भी बनीं।
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