उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तकनीक के सहारे यह पता लगाया जा सकता है कि किस इंसान को एक या डेढ़ साल बाद हार्ट अटैक या कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का खतरा हो सकता है। लेकिन इसके लिए बड़ी संख्या में इस कोर्स के जानकारों की जरूरत पड़ने वाली है।
इसी तरह से जीबीयू में एमएससी इन मॉलीक्यूलर मेडिसिन कोर्स भी शुरू किया गया है। विवि ने इस कोर्स के लिए 40 सीटें रखी हैं। यह जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नया कोर्स है। इससे चिकित्सा अनुसंधान के लिए भविष्य में शोधकर्ता और वैज्ञानिक तैयार हो सकेंगे, जो कैंसर, सिंथेटिक जीव विज्ञान, हृदय रोग के उपचार में उपयोगी होंगे। वहीं, जीनोम कोर्स भी आने वाले वक्त में उपयोगी सबित होगा। इसके अलावा एमबीए इन बिजनेस एनालिटिक्स के माध्यम से विद्यार्थियों को वो क्षमता विकसित हो सकेगी जो बाजार को नया रुख दे सके।