पहला सम्मेलन जेएनयू में हुआ, अब जीबीयू को मौका
कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने बताया कि दुनिया के कई देशों ने अपनी पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को विकास का आधार बनाया है। ऐसे समय में जीबीयू को इस सम्मेलन की मेजबानी मिलना विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा पर पहला वार्षिक सम्मेलन जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में आयोजित हुआ था और अब इसकी मेजबानी जीबीयू कर रहा है। इससे विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी।
कुलसचिव प्रो. चंदर कुमार सिंह ने कहा कि यह सम्मेलन 'विकसित भारत-2047' के लक्ष्य और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम है। जीबीयू में हर वर्ष 20 से अधिक देशों के विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते हैं और विदेशी छात्रों की बढ़ती संख्या भारतीय शिक्षा प्रणाली पर बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।
तीन दिवसीय सम्मेलन में 100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अलावा विषय विशेषज्ञों के संवाद सत्र, पैनल चर्चा और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। देश-विदेश के शोधकर्ताओं को अपने शोध और विचार साझा करने का अवसर मिलेगा।
विकसित भारत-2047 की दिशा में अहम पहल
मानना है कि यह सम्मेलन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सोच को मजबूती देगा और ज्ञान परंपराओं को आधुनिक शिक्षा, शोध तथा वैश्विक अकादमिक विमर्श से जोड़ने में भूमिका निभाएगा। विदेशी छात्रों की बढ़ती भागीदारी भी इसकी वैश्विक उपयोगिता को रेखांकित करती है।