आगामी शैक्षणिक सत्र 2024 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत छठीं कक्षा से वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई होगी। केंद्रीय स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने बताया कि अगले साल से चरणबद्ध तरीके से स्कूलों में छठीं कक्षा में वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई शुरू हो जाएगी। शुरुआत कुछ स्कूलों से होगी। राज्यों से उनके अधीनस्थ स्कूलों में वोकेशनल कोर्स शुरू करने की सिफारिश की जा रही है।
केंद्रीय स्कूली शिक्षा सचिव ने कहा कि देशभर में 14 लाख 80 हजार स्कूल हैं। सात लाख स्कूल छठीं से 12वीं कक्षा के है। जबकि दो हजार स्कूल केंद्र सरकार के अधीनस्थ है। इतनी बड़ी संख्या में वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई शुरू करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पड़ेगी। खास तौर पर दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में स्कूलों में खास तैयारी करनी होगी। स्कूलों में उपकरण और ट्रेनर भी रखे जाएंगे। इसके लिए राज्यों से बात करके इसकी तैयारी की जाएगी। स्पोक एंड हब थीम पर वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई होगी।
एनईपी के तहत ही कर सकते हैं बदलाव
स्कूली शिक्षा सचिव ने बताया कि केंद्र सरकार स्कूली शिक्षा में कौशल विकास का पाठ्यक्रम और कोर्स तैयार करके देगी। राज्य इसमें अपनी मांग के आधार पर बदलाव कर सकते हैं। राज्यों को आजादी मिलेगी कि वे नया काेर्स जोड़ सकेंगे। स्कूली शिक्षा विभाग और एनसीईआरटी राज्यों के शिक्षा विभाग के साथ इस पर काम करेगा। एनसीईआरटी अकेडमिक करिकुलम फ्रेमवर्क बना रहा है। हालांकि राज्यों को यह अधिकार होगा कि वह राष्ट्रीय पाठ्यक्रम को अपना लें या अपना पाठ्यक्रम तैयार करें या फिर राष्ट्रीय पाठ्यक्रम के तहत नया विषय भी जोड़ सकते हैं।
अगले सत्र में नया पाठ्यक्रम और नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क
स्कूली शिक्षा सचिव ने कहा एनईपी के तहत स्कूली शिक्षा का नया पाठ्यक्रम और नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क इसी साल के अंत तक आ जाएगा। हालांकि स्कूली पाठ्यक्रम में कौशल विकास को शामिल करना चुनौती है। मंत्रालय ने नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क तैयार किया है। शिक्षा के विभिन्न आयाम में कोई फर्क नहीं होगा।
इसका मतलब है कि साइंस, स्पोर्ट्स, ह्यूमैनिटीज, फिजिकल एजुकेशन, आर्ट्स और वोकेशनल स्ट्रीम में कोई फर्क नहीं होगा। शैक्षणिक सब्जेक्ट के लिए जैसे क्रेडिट प्राप्त करते हैं, उसी प्रकार वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई करने पर क्रेडिट मिलेंगे।