डाॅ. राधाकृष्णन
- फोटो : राष्ट्रपति भवन फोटो आर्काइव
160 इमारतों तोड़ा और 300 परिवारों को किया गया बेदखल
लिडल में अपनी एक किताब में लिखा है कि इस क्षेत्र में उन ग्रामीणों की झोपड़ियां और घर भी थी जिनकी भूमि हाल ही में 1894 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत अधिग्रहित की गई थी। 1911 और 1916 के बीच करीब 300 परिवारों को बेदखल कर दिया गया। नतीजतन, नगर नियोजन समिति कौन-सी संरचना को तोड़ा जा सकता है और किसे नहीं इसकी सूची तैयार की। मस्जिदों, मंदिरों और मकबरों की सूची तैयार की गई। 'संरक्षित किया जाना चाहिए' की सूची में 45 संरचनाओं को शामिल किया गया। इनमें सफदरजंग का मकबरा, हुमायूं का मकबरा और जंतर-मंतर जैसी संरचनाएं शामिल थी।
'जब तक विनाश अनिवार्य न हो तब तक नष्ट नहीं किया जाना चाहिए' नामक सूची में 33 इमारतों को शामिल किया गया। सांस्कृतिक महत्व वाली संरचनाओं में बंगला साहिब गुरुद्वारा, बाबा खड़क सिंह मार्ग पर स्थित हनुमान मंदिर आदि को शामिल किया गया। वहीं संरक्षित न करने की सूची में 160 इमारतों का नाम लिखा गया। इस तरह नई दिल्ली का निर्माण कार्य सम्पन्न हुआ और 1931 में भारत की राजधानी के रूप में इसका उद्धाटन किया गया।