परीक्षा केंद्रों की शिकायतों की भी हुई जांच
जिन परीक्षा केंद्रों पर ज्यादा गर्मी और वेंटिलेशन की समस्या की शिकायत की गई थी, वहां के परीक्षा परिणामों की भी जांच की गई। जांच में इन केंद्रों के परिणामों में कोई बड़ा अंतर नहीं मिला। इसलिए समिति को वीडियो आधारित सवालों या तापमान से जुड़ी समस्याओं के लिए ग्रेस मार्क्स देने का कोई ठोस आधार नहीं मिला।
समिति ने यह भी कहा कि एफएमजीई में ग्रेस या क्षतिपूर्ति अंक देने में कानूनी और नियमों से जुड़ी कुछ बाधाएं हैं। परीक्षा की व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के 2004 के संजीव गुप्ता और अन्य बनाम भारत सरकार और अन्य मामले में दिए गए फैसले से तय दिशा-निर्देशों पर आधारित है।
भविष्य की परीक्षाओं में सुधार की सिफारिश
समिति ने उम्मीदवारों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कई सुधार सुझाए हैं। इनमें मल्टीमीडिया सवालों से पहले उम्मीदवारों को इसकी जानकारी देना, परीक्षा केंद्रों की सुविधाएं और आपातकालीन व्यवस्था बेहतर करना शामिल है। उम्मीदवारों को उनके जवाब और प्राप्त अंकों की जानकारी देकर पारदर्शिता बढ़ाने की भी सिफारिश की गई है।
समिति ने एफएमजीई परीक्षा साल में कम से कम तीन बार कराने, परीक्षा शुल्क की समीक्षा करने और आसान सवालों की संख्या बढ़ाने का सुझाव भी दिया है। हालांकि, उपलब्ध सबूतों के आधार पर एफएमजीई जून 2026 के परिणाम में बदलाव या ग्रेस मार्क्स देने का कोई आधार नहीं मिला है।