फाईमा ने फैसले को बताया मेडिकल शिक्षा के लिए खतरनाक
फाईमा ने अपने पत्र में कहा है कि नीट पीजी जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धी परीक्षा का उद्देश्य योग्य और सक्षम डॉक्टरों का चयन करना होता है। ऐसे में कटऑफ को इतना नीचे लाना परीक्षा की विश्वसनीयता, उद्देश्य और नैतिकता पर सवाल खड़े करता है।
संघ का कहना है कि नकारात्मक अंक लाने वाले उम्मीदवारों को पीजी मेडिकल ट्रेनिंग की अनुमति देना किसी भी शैक्षणिक या नैतिक मानक पर उचित नहीं ठहराया जा सकता। इससे भविष्य में बनने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों की गुणवत्ता प्रभावित होगी, जिसका सीधा असर मरीजों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर पड़ेगा।
सरकारी अस्पतालों और मरीजों पर पड़ेगा इसका बुरा असर
फाईमा ने यह भी चेतावनी दी है कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर सरकारी और शिक्षण अस्पतालों पर निर्भर गरीब और कमजोर वर्गों पर पड़ेगा। संगठन का कहना है कि कम योग्यता वाले डॉक्टरों को विशेषज्ञ प्रशिक्षण देना मरीजों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
संघ ने आशंका जताई है कि इस तरह के फैसलों से यह संदेश जाएगा कि नीट पीजी जैसी परीक्षा की कोई खास अहमियत नहीं रह गई है, क्योंकि एडमिशन अब मेरिट की बजाय केवल सीटें भरने के लिए दिया जा रहा है।
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फैसला वापस न लेने पर आंदोलन की चेतावनी
फाईमा ने पत्र में स्पष्ट कहा है कि वह इस फैसले की कड़ी निंदा करता है और केंद्र सरकार व एनबीईएमएस से मांग करता है कि इस नोटिफिकेशन को तुरंत वापस लिया जाए। संगठन ने तार्किक और मेरिट आधारित कटऑफ बहाल करने की मांग की है।
फाईमा ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो संगठन देशभर के रेजिडेंट डॉक्टरों और मेडिकल एसोसिएशनों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने को मजबूर होगा।