मूल्यांकन करें
आप मूल्यों और कमजोरियों को समझकर, नैतिक लक्ष्य निर्धारित करके और व्यवहार को निर्देशित करने के लिए 'अगर-तो' जैसी रणनीतियों को अपना सकते हैं। इससे आप नैतिक चुनौतियों से लड़ने के लिए तैयार हो सकेंगे। नैतिक सलाहकारों के साथ संबंध बनाएं और ऐसे कार्यस्थल चुनें, जो आपके मूल्यों के अनुरूप हों। नैतिक दुविधाओं पर खुलकर चर्चा करना ईमानदारी के प्रति आपकी प्रतिबद्धता को मजबूत कर सकता है। उच्च-तनाव या नैतिक रूप से चुनौतीपूर्ण वातावरण में, आत्म-नियंत्रण बनाए रखें।
जल्दबाजी न करें
कार्यस्थल पर नैतिक निर्णय लेना कठिन हो सकता है। ऐसे में इसके नियमों, परिणामों और गुणों जैसे विभिन्न कारकों पर विचार करके ही निर्णय लें। बहाने बनाकर गलत कार्यों को उचित ठहराने से बचें। प्रचार परीक्षण (क्या आप इसे प्रकाशित करना चाहेंगे?), दर्पण परीक्षण (क्या आप चाहते हैं कि आप बाद में किससे मिलें?) जैसे परीक्षणों का उपयोग करें और कोई भी निर्णय लेने में जल्दबाजी करने से बचें। संदेह की स्थिति में नैतिक सलाहकारों की मदद लें, कंपनी की नीतियों की समीक्षा करें, या गंभीर चिंताओं पर सुझाव देने वाले औपचारिक चैनलों का उपयोग करें।
गलतियां दोहराने से बचें
पिछले कार्यों से सीखना नैतिक विकास के लिए सबसे जरूरी है। अच्छे और बुरे, दोनों तरह के निर्णयों पर चिंतन करने से बार-बार की जाने वाली गलतियों से बचने में मदद मिलती है। नैतिक लोग भी परिपूर्ण नहीं होते, लेकिन जब वे गलतियां करते हैं, तो वे उन पर पुनर्विचार करते हैं और उन पर चिंतन करते हैं, ताकि वे भविष्य में सही निर्णय ले सकें। भरोसेमंद लोगों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने की कोशिश करें। इससे नए दृष्टिकोण मिल सकते हैं।