फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Raksha Bandhan 2023: रक्षा बंधन पर निबंध लिखना है तो पढ़िए ये खबर, मिलेगी काम की जानकारी

Mon, 28 Aug 2023 03:00 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Raksha Bandhan 2023: रक्षा बंधन को लेकर स्कूल कॉलेज में निबंध लिखना पड़ता है। यहां दी गई जानकारी आपके निबंध लेखन में काफी काम आ सकती है। पढ़िए क्या है भाई बहन के इस पर्व का इतिहास।
 
विज्ञापन
Raksha Bandhan 2023 - फोटो : Amar Ujala Graphics
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Raksha Bandhan 2023: भारत में साल भर में कई पर्व मनाए जाते हैं। रक्षा बंधन उन्ही पर्वों में से एक मुख्य पर्व है। यह त्योहार भाई और बहन के बीच एक खास बंधन का जश्न मनाने का अवसर प्रदान करता है। इस मौके पर ढेर सारी मिठाइयां बनाई जाती हैं और बहनें अपने भाइयों को राखी बांधती हैं और इसके बदले में भाई अपनी बहन की जीवनभर रक्षा करने का वचन देता है। इसके अलावा, भाइयों द्वारा बहनों को कुछ उपहार भी दिए जाते हैं। रक्षा बंधन आमतौर पर अगस्त महीने के महीने में मनाया जाता है, जब पूर्णिमा का दिन आता है।

विज्ञापन

भाई बहन के प्यार का प्रतीक है रक्षा-बंधन

रक्षा बंधन त्योहार भाई-बहन के रिश्ते के महत्व को स्पष्ट करता है, और यह उनके प्यार और साथी बंधन का प्रतीक होता है। राखी बांधने से पहले, बहनें अपने भाइयों की पूजा करती हैं और फिर उनके कलाई पर एक धागा या राखी बांधती हैं, जिससे रिश्ता गहरा और मजबूत होता है। इसके बाद, भाई बहन को उपहार देते हैं, जो इस प्यार भरे पल को और भी यादगार बनाते हैं। यह एक पुरानी परंपरा है। इसके इतिहास को लेकर सबसे प्रचलित कहानी रानी कर्णावती और हुमायूं की है।

रक्षा-बंधन का इतिहास

रक्षा बंधन की शुरुआत को लेकर कहा जाता है कि इसकी शुरुआत हिन्दू रानी कर्णावती के मुस्लिम शासक हुमायूं को राखी बांधने से हुई। एक समय था, जब देश में राजपूत शासक मुस्लिम आक्रमण के खिलाफ जंग लड़ रहे थे। मेवाड़ के राजा राणा सांगा की मौत के बाद मेवाड़ की कमान रानी कर्णावती के हाथों में आई।

विज्ञापन

ऐसे रखा राखी का मान

गुजरात के बहादुर शाह ने उस दौरान मेवाड़ पर दूसरी बार आक्रमण किया था। ऐसे में रानी कर्णावती ने हुमायूं से मदद मांगने लिए उसे राखी भेजी। हालांकि, हुमायूं की सेना समय पर मेवाड़ नहीं पहुंच पाई और चित्तौड़ में राजपूत सेना की हार गई। रानी ने अपने सम्मान की रक्षा के लिए जौहर कर लिया, लेकिन हुमायूं की सेना ने चित्तौड़ से शाह को खदेड़ भगाया। हुमायुं ने रानी के पुत्र विक्रमजीत को गद्दी सौंप राखी का मान रखा। रानी कर्णावती और हुमायुं की कहानी के अलावा भी रक्षा बंधन के इतिहास को लेकर कई और कहानियां प्रचलित हैं।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें