दिल्ली में पेइंग गेस्ट (पीजी) आवासों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने पहल तेज कर दी है। राजधानी में छात्रों के पीजी आवासों से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया जा रहा है। इसके माध्यम से यह जानकारी मिल सकेगी कि छात्र किन जगहों पर रह रहे हैं और वहां उन्हें कौन-कौन सी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा, दिल्ली में चिह्नित 100 पीजी आवासों का अगले तीन दिनों में निरीक्षण करने की योजना है। इसका उद्देश्य आवासों की स्थिति और सुरक्षा मानकों की जांच करना है।
पीजी आवासों की जांच क्यों होगी?
दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार पीजी व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में कदम उठा रही है। योजना के तहत भवनों में सुरक्षा मानकों और संबंधित नियमों के पालन की स्थिति की जांच की जाएगी। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की संयुक्त टीमें अगले तीन दिनों में चिह्नित 100 पीजी आवासों का निरीक्षण करेंगी। इस पहल का मकसद संभावित सुरक्षा खामियों की पहचान करना और छात्रों के लिए सुरक्षित आवास व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में काम करना है।
ऑनलाइन पोर्टल पर क्या जानकारी मिलेगी?
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में छात्र आवास एवं सुरक्षा से जुड़ी उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक में ऑनलाइन पोर्टल तैयार करने का फैसला लिया गया। शुरुआती चरण में इस पोर्टल पर पीजी में उपलब्ध कमरों की संख्या और बुनियादी सुविधाओं से संबंधित जानकारी दर्ज की जाएगी। दिल्ली विश्वविद्यालय और नगर निगम मिलकर पोर्टल का शुरुआती परीक्षण करेंगे। इसके बाद छात्रों के पंजीकरण के लिए अभियान चलाने की योजना है। सरकार का उद्देश्य पीजी आवासों की जानकारी एक जगह उपलब्ध कराना, उनकी निगरानी बेहतर बनाना और छात्रों को रहने के लिए सुरक्षित विकल्पों की पहचान करने में मदद करना है।
पीजी संचालन के नियमों में क्या बदलाव होंगे?
दिल्ली सरकार ने पीजी आवासों के कानूनी संचालन की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए एक उप-समिति बनाई है। इसमें डीडीए, एमसीडी, दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि शामिल हैं। समिति प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों के आसपास और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी में पीजी संचालित करने से जुड़े पहलुओं की समीक्षा करेगी। इसके लिए मास्टर प्लान और संबंधित कानूनों के प्रावधानों का अध्ययन भी किया जाएगा। इस प्रक्रिया के जरिए यह समझने की कोशिश होगी कि किन क्षेत्रों में और किन शर्तों के तहत पीजी आवासों का संचालन किया जा सकता है। हालांकि, प्रस्तावित बदलावों के अंतिम नियमों की जानकारी अलग से जारी होने पर ही स्पष्ट होगी।
पीजी में सीसीटीवी को लेकर क्या प्रस्ताव है?
प्रस्तावित नियमों के तहत पीजी आवासों के प्रवेश और निकास द्वारों के साथ साझा जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य करने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा, कैमरों की रिकॉर्डिंग का 40 से 45 दिनों तक बैकअप रखने का प्रस्ताव भी है। इससे किसी घटना की स्थिति में रिकॉर्डिंग की मदद से जानकारी जुटाई जा सकेगी। हालांकि, छात्रों की निजता का ध्यान रखते हुए उनके निजी कमरों और व्यक्तिगत स्थानों पर निगरानी नहीं की जाएगी। फिलहाल ये प्रावधान प्रस्तावित नियमों का हिस्सा हैं। इनके अंतिम रूप और लागू होने की स्थिति के बारे में आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।