विवाद के बीच मंत्री का जवाब- “शिक्षा के साथ राजनीति मत खेलिए”
शिवनकुट्टी ने कहा कि कुछ लोग शिक्षा विभाग को बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं। जब UDF सरकार में लैब्बा कमेटी की सिफारिशों के बाद स्कूल समय सुबह 9 से शाम 4:30 बजे किया गया था, तब किसी ने सवाल नहीं उठाया। अब विरोध क्यों?उन्होंने यह भी बताया कि गुजरात, यूपी, दिल्ली, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पहले से केरल से ज्यादा कार्यदिवस होते हैं। यही नहीं, राज्य के CBSE और ICSE स्कूलों में भी राज्य स्कूलों से अधिक पढ़ाई के घंटे हैं।
धार्मिक संगठनों का विरोध, सरकार ने बातचीत का दिया न्योता
मुस्लिम संगठनों जैसे कि समस्त केरल जमीयत उल उलेमा ने धार्मिक शिक्षा में बाधा बताते हुए इस बदलाव का विरोध किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि अगर किसी को संदेह है, तो हम चर्चा के लिए तैयार हैं। कानून बदलने के लिए विधानसभा में संशोधन जरूरी होता है।
शिवनकुट्टी ने कहा कि नए एकेडमिक कैलेंडर में नशा विरोधी अभियान, कला एवं खेल उत्सव, दिव्यांग छात्रों के लिए गतिविधियां और छात्रवृत्तियों को भी शामिल किया गया है, जिससे राज्य का पब्लिक एजुकेशन सिस्टम और समावेशी हो सके।