माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय आने वाले 15 अगस्त से नए सामुदायिक रेडियो की शुरुआत करने जा रहा है। इसके लिए विश्वविद्यालय को फ्रीक्वेंसी का भी आवंटन हो गया है। विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति के तहत कई नए पाठ्यक्रम शुरू हो चुके हैं। आने वाले सत्र में विश्वविद्यालय भारतीय भाषाओं में भी पत्रकारिता के पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) केजी सुरेश ने अमर उजाला को बताया कि नई शिक्षा नीति को लागू करने से विश्वविद्यालय में प्रवेश बहुत अच्छा रहा है।
उन्होंने कहा कि हमने पाठ्यक्रम भी बढ़ा दिए हैं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत हमने कुल 10 नए पाठ्यक्रम शुरू किए हैं जो चार वर्षीय हैं। इस नीति के तहत ही हमने भाषा को बहुत महत्व दिया है। इसके तहत भारतीय भाषा विभाग की स्थापना की गई है। पहली बार हिंदी भाषा का कोर्स शुरू किया है। नीति के तहत वोकेशनल शिक्षा को महत्व देते हुए सिनेमा अध्ययन विभाग की स्थापना की गई है।
15 अगस्त से हम सामुदायिक रेडियो 'कर्मवीर' शुरू कर रहे हैं। यह सामुदायिक रेडियो न केवल विश्वविद्याल के छात्रों के लिए होगा बल्कि, विश्वविद्यालय के आसपास के गांवों को भी इससे लाभ मिलेगा। छात्रों को ग्रामीण पत्रकारिता करने का अनुभव मिलेगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय ड्रोन पत्रिकारिता पर प्रशिक्षण शुरू करने की तैयारी में है।
भारतीय ज्ञान परंपरा को दिया जा रहा महत्व
कुलपति ने कहा कि जितने पीएचडी कोर्स हैं उनमें भारतीय ज्ञान परंपरा को महत्व दिया है। हमनें पीएचडी कोर्स में भारतीय ज्ञान परंपरा को जोड़ने को आवश्यक कर दिया है। हमने चार वर्षीय स्नातक डिग्री कोर्स को इस तरह से बनाया गया है कि यदि विद्यार्थी एक साल में छोड़ना चाहे तो उसे सर्टिफिकेट मिले। दो साल बाद डिप्लोमा, तीन साल बाद डिग्री और चार साल बाद डिग्री लेने वाला छात्र रिसर्च की योग्यता ले सकता है। यदि इसके बाद वह मास्टर्स प्रोग्राम करता है तो वह एक साल का ही होगा। हालांकि, बीते दो साल से हम इसे चाल रहे हैं। अब तक किसीविद्यार्थी कोर्स बीच में नहीं छोड़ा है।
छात्रों की भाषा को बेहतर करने का पर जोर
विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि हम डिजिटल स्टूडियो भी बना रहे हैं। भाषा को बेहतर बनाने के लिए हम एक भाषा प्रयोगशाला भी बना रहे हैं। हमें फीडबैक मिलता है कि छात्रों का भाषा का स्तर कमजोर हो रहा है। इसे बेहतर करने के लिए विश्वविद्यालय लगातार प्रयास कर रहा है। भारतीय भाषा के तहत नेशनल काउन्सिल फॉर प्रोमोशन ऑफ सिंधी लैंग्वेज के साथ मिलकर सिंधी पत्रकारिता में एक डिप्लोमा प्रोग्राम शुरू होने जा रहा है। वहीं अगले साल से मराठी पत्रकारिता का भी कोर्स शुरू करने की योजना है। इसके साथ ही इस साल एक नई पहल में सेल्फ फायनेंस मोड में अंग्रेजी ऑनर्स का भी कोर्स शुरू कर दिया गया है। क्योंकि अंग्रेजी माध्यम के बच्चों को अंग्रेजी पत्रकारिता के लिए राज्य के बाहर जाना पड़ता है।
केरल की संस्था के साथ किया एमओयू
विश्वविद्यालय में अभी हिंदी, मराठी और सिंधी भाषाओं में कोर्स हैं। नई शिक्षा नीति के तहत ही केरल की एक संस्था महात्मा गांधी कॉलेज ऑफ कम्युनिकेशन से हमारा एमओयू हुआ है, जिसके तहत इसके विद्यार्थी हमारे यहां कुछ दिनों के लिए पढ़ने आएंगे। कुलपति केजी सुरेश ने बताया कि भविष्य में यदि मांग बढ़ती है तो अन्य भारतीय भाषाओं में कोर्स शुरू किए जाएंगे।
प्लेसमेंट के साथ उद्यमी बनाने पर भी जोर
कुलपति केजी सुरेश ने बताया कि हमने अपने प्लेसमेंट प्रकोष्ठ को अब पेल्समेंट और उद्यमिता प्रकोष्ठ कर दिया है। आज के समय में बहुत से छात्र यूट्यूब, वेबसाइट, चैनल भी शुरू कर रहे हैं। इनके लिए हम प्रशिक्षण का भी आयोजन कर रहे हैं। हम बच्चों को उद्यमिता के लिए भी तैयार कर रहे हैं।