शिक्षा मंत्रालय के राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (एनएएस)-2021 के मुताबिक 44 फीसदी शिक्षकों के पास पर्याप्त कार्य स्थान का अभाव है, जबकि 65 प्रतिशत पर काम का बोझ है। सर्वेक्षण के मुताबिक 58 फीसदी शिक्षकों ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चा में भाग लिया है।
देश में स्कूल जाने वाले बच्चों में 48 फीसदी पैदल स्कूल जाते हैं। महज नौ प्रतिशत बच्चे ही स्कूल के वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। शिक्षा मंत्रालय के राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (एनएएस)-2021 की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। सर्वेक्षण के मुताबिक 25 फीसदी स्कूलों में छात्रों के अध्ययन के लिए जरूरी अभिभावकों की सहायता का अभाव है।
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सर्वेक्षण में 720 जिलों के 1.18 लाख स्कूूलों के 34 लाख छात्रों को शामिल किया गया। पिछले साल 12 नवंबर को देशभर में तीसरी, पांचवीं, आठवीं व 10वीं कक्षाओं के लिए यह सर्वेक्षण किया गया। मंत्रालय के मुताबिक, एनएएस-2021 का आयोजन शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग ने किया। इसके पहले 2017 में एनएएस किया गया था।
25% अभिभावक नहीं करते बच्चे की पढ़ाई में सहयोग
87 फीसदी स्कूल छात्रों की पढ़ाई के लिए अभिभावकों का मार्गदर्शन करते हैं जबकि 25 प्रतिशत स्कूलों ने अभिभावकों की तरफ से छात्रों के अध्ययन में सहयोग न मिलने की बात कही।
18% बच्चे साइकिल से, नौ फीसदी सार्वजनिक वाहनों, नौ प्रतिशत स्कूली वाहनों से, आठ प्रतिशत अपने दोपहिया वाहनों और तीन प्रतिशत अपने चौपहिया वाहन से स्कूल जाते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 89 प्रतिशत बच्चे स्कूल में पढ़ाए गए पाठ को अपने परिवार के साथ साझा करते हैं।
65 फीसदी शिक्षकों पर काम का बोझ
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शिक्षा मंत्रालय के राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (एनएएस)-2021 के मुताबिक 44 फीसदी शिक्षकों के पास पर्याप्त कार्य स्थान का अभाव है, जबकि 65 प्रतिशत पर काम का बोझ है। सर्वेक्षण के मुताबिक 58 फीसदी शिक्षकों ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चा में भाग लिया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के 1.18 लाख स्कूलों के पांच लाख शिक्षकों ने एनएएस-2021 में भाग लिया।
97 फीसदी शिक्षकों ने अपनी नौकरी से संतुष्टी जताई है, इनमें से 92 फीसदी ने उनके व्यावसायिक विकास की गुंजाइश की बात कही है। सर्वेक्षण के मुताबिक 52 फीसदी ने डीआईईटी, सीबीएसई और एनसीईआरटी द्वारा आयोजित व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों में भाग लिया है।