दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में प्रचार का आज आखिरी दिन है। प्रत्याशियों ने वोटरों तक पहुंचने के लिए जनसंपर्क तेज कर दिया है। इसके बाद कल नो कैंपेनिंग डे रहेगा और प्रत्याशी प्रचार नहीं कर सकेंगे। प्रचार थमने के बाद सोशल मीडिया के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर जोर रहेगा।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में प्रचार का शोर मंगलवार को चरम पर पहुंच गया। चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों और उनके छात्र संगठनों ने आखिरी दौर में जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी। बुधवार को प्रचार थम जाएगा ऐसे में उम्मीदवारों ने मंगलवार को अपना पूरा जोर लगा दिया। कॉलेजों की विभिन्न एक्स्ट्रा करिकुलर सोसाइटियों के बीच भी प्रत्याशियों ने पहुंचकर छात्रों की समस्याएं जानीं और उन्हें हल करने का भरोसा देते हुए अपने पैनल के लिए वोट मांगे।
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छात्र संगठनों का मानना है कि चुनाव से पहले के अंतिम दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। बुधवार शाम आधिकारिक रूप से प्रचार समाप्त होने के बाद बृहस्पतिवार को नो कैंपेनिंग डे रहेगा। इसके बाद प्रत्याशियों का मुख्य फोकस सोशल मीडिया के जरिए छात्रों तक पहुंच बनाने पर रहेगा। ऐसे में चुनावी मुकाबला अब अंतिम अपील और मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने की रणनीति पर टिक गया है।
एबीवीपी ने 16 वर्षों में 9 बार अध्यक्ष पद जीता
मंगलवार को एनएसयूआई के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी विजय शंकर एबीवीपी की ओर से बीते वर्षों में अध्यक्ष पद पर जीत की उपलब्धि को गिनाते हुए वोट देने की अपील की जा रही है। एबीवीपी के अनुसार वर्ष 2010 से अब तक हुए 13 चुनावों मीणा, उपाध्यक्ष वीर चतरथ, सचिव नम्रता चौधरी, सहसचिव गोपाल चौधरी ने कई कॉलेजों में जाकर छात्रों से अपने पैनल के लिए वोट डालने की अपील में एबीवीपी ने 9 बार अध्यक्ष पद पर विजय प्राप्त की है।
वहीं एबीवीपी ने 1971 से चुनाव लडना शुरू किया, वर्ष 1973 में पहले प्रत्यक्ष चुनाव में चारों पदों पर विजय प्राप्त की। साथ ही घोषणा पत्र में किए गए वादों को पूरा करने का आश्वासन दिया। वहीं एबीवीपी के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी यश डबास, उपाध्यक्ष ईशू मौर्या, सचिव रिया छाबड़ी, सहसचिव लक्ष्य राज सिंह ने कॉलेज परिसरों में प्रचार किया।
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आइसा व आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन एएसएपी के उम्मीदवारों ने भी अपने पैनल के लिए समर्थन मांगा। प्रत्याशी कॉलेज, छात्रावास व पीजी में रहने वाले छात्रों से संपर्क साध रहे हैं। खासकर जो छात्र बाहरी राज्यों से आए हैं और पीजी या प्राइवेट हॉस्टल में रहते हैं उनसे वोट देने की अपील की जा रही है।