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डीयू: कुल स्कोर बढ़ने के बाद भी 11 पायदान क्यों फिसला दिल्ली विश्वविद्यालय? जानें रैंकिंग में गिरावट की वजह

Thu, 05 Nov 2026 10:21 AM IST
शिवम तिवारी नई दिल्ली, पीटीआई

सार

क्यूएस एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में दिल्ली विश्वविद्यालय 11 स्थान फिसलकर 106वें पायदान पर पहुंच गया है। हालांकि, विश्वविद्यालय का कुल स्कोर 68.5 से बढ़कर 70 हो गया। 11 में से नौ मानकों पर सुधार दर्ज किया गया है। अंतरराष्ट्रीय छात्रों, विदेशी शिक्षकों और प्रति शिक्षक शोध पत्रों के मामले में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद रैंकिंग में गिरावट आई है।
 
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दिल्ली विश्वविद्यालय - फोटो : AI Generated
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विस्तार
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दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) क्यूएस एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में 11 स्थान फिसलकर 106वें पायदान पर पहुंच गया है। विश्वविद्यालय ने बुधवार, 4 नवंबर को जारी तुलनात्मक आकलन में यह जानकारी दी। खास बात यह है कि रैंकिंग में गिरावट के बावजूद डीयू के कुल स्कोर में सुधार हुआ है। साल 2026 में विश्वविद्यालय का कुल स्कोर 68.5 था, जो 2027 में बढ़कर 70 हो गया। इसके बावजूद एशिया की विश्वविद्यालय रैंकिंग में इसकी जगह 95वें से घटकर 106वें स्थान पर पहुंच गई। यानी बेहतर कुल स्कोर के बाद भी विश्वविद्यालय अपनी पिछली रैंक बरकरार नहीं रख सका।
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क्यूएस एशिया रैंकिंग में विश्वविद्यालयों का आकलन 11 अलग-अलग मानकों के आधार पर किया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय ने इनमें से नौ मानकों पर अपने स्कोर में सुधार दर्ज किया। सबसे ज्यादा बढ़त अंतरराष्ट्रीय छात्रों के अनुपात, प्रति शिक्षक शोध पत्रों और विदेशी शिक्षकों के अनुपात में देखने को मिली। विश्वविद्यालय के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय छात्रों के अनुपात का स्कोर 9.2 से बढ़कर 16.8 हो गया। वहीं, विदेशी शिक्षकों के अनुपात का स्कोर 3.4 से बढ़कर 9.2 पहुंच गया। प्रति शिक्षक शोध पत्रों का स्कोर भी 87.7 से बढ़कर 95 हो गया। इन सुधारों के बावजूद कुल रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई।

शोध और शिक्षकों के मामले में कितना सुधार?

दिल्ली विश्वविद्यालय ने शोध से जुड़े कुछ दूसरे मानकों पर भी बेहतर प्रदर्शन किया। प्रति शोध पत्र उद्धरण का स्कोर 19.5 से बढ़कर 24.6 हो गया। इसका मतलब है कि विश्वविद्यालय के शोध पत्रों को दूसरे शोध कार्यों में उद्धृत किए जाने के मामले में सुधार हुआ। पीएचडी डिग्री वाले शिक्षकों का स्कोर भी 94.7 से बढ़कर 99.4 पहुंच गया। इसके अलावा, नियोक्ताओं के बीच विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा का स्कोर 86.1 से बढ़कर 88.6 हो गया। शिक्षक और छात्र अनुपात का स्कोर भी 15.1 से बढ़कर 16.3 दर्ज किया गया।

किन मानकों पर पिछड़ा विश्वविद्यालय?

सभी मानकों पर सुधार के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय के दो क्षेत्रों में मामूली गिरावट भी दर्ज की गई। शैक्षणिक प्रतिष्ठा का स्कोर 91.1 से घटकर 90.8 हो गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय शोध नेटवर्क का स्कोर 99.4 से कम होकर 99.3 पर पहुंच गया। इन दोनों मानकों में गिरावट के साथ विश्वविद्यालय की कुछ व्यक्तिगत रैंकिंग भी नीचे आई। अंतरराष्ट्रीय शोध नेटवर्क में डीयू सात स्थान फिसलकर 27वें पायदान पर पहुंच गया। शैक्षणिक प्रतिष्ठा की रैंकिंग में भी चार स्थान की गिरावट आई और विश्वविद्यालय 61वें स्थान पर रहा।

किन क्षेत्रों में मिली बेहतर रैंकिंग?

कुछ मानकों पर दिल्ली विश्वविद्यालय ने रैंकिंग में अच्छी बढ़त भी हासिल की। प्रति शिक्षक शोध पत्रों के मामले में विश्वविद्यालय 17 स्थान ऊपर चढ़कर 101वें पायदान पर पहुंच गया। पीएचडी डिग्री वाले शिक्षकों के मानक में सबसे ज्यादा 54 स्थानों का सुधार दर्ज किया गया और डीयू 118वें स्थान पर रहा। नियोक्ताओं के बीच प्रतिष्ठा के मामले में भी विश्वविद्यालय ने तीन स्थान की बढ़त हासिल की। इस मानक पर उसकी रैंकिंग 96वीं रही। ये आंकड़े बताते हैं कि शोध कार्य और शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता विश्वविद्यालय के मजबूत क्षेत्रों में शामिल हैं।

किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत?

तुलनात्मक आकलन में कुछ ऐसे क्षेत्र भी बताए गए हैं, जहां दिल्ली विश्वविद्यालय को आगे काम करने की जरूरत है। इनमें प्रति शोध पत्र उद्धरण, शिक्षक-छात्र अनुपात और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छात्रों और शिक्षकों की आवाजाही से जुड़े मानक शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छात्रों और शिक्षकों की भागीदारी तथा उनकी विविधता से जुड़े कुछ मानक भी 501 से आगे की रैंकिंग श्रेणी में बने हुए हैं। आकलन के मुताबिक, शोध पत्रों की संख्या और शिक्षकों की योग्यता विश्वविद्यालय के मजबूत पक्ष हैं, जबकि शोध पत्रों का प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ाव अब भी बड़ी चुनौतियां हैं।

कुल स्कोर बढ़ने पर भी रैंक क्यों गिरी?

दिल्ली विश्वविद्यालय का कुल स्कोर बढ़ने के बावजूद रैंकिंग में गिरावट दर्ज होना इस बात की ओर इशारा करता है कि विश्वविद्यालयों की जगह केवल उनके अपने स्कोर से तय नहीं होती। दूसरे विश्वविद्यालयों का प्रदर्शन भी रैंकिंग में उनकी स्थिति को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, जारी तुलनात्मक आकलन में दूसरे विश्वविद्यालयों के प्रदर्शन का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। डीयू के मामले में 2027 में कुल स्कोर 70 रहा, जबकि 2026 में यह 68.5 था। वहीं, पिछले साल के मुकाबले विश्वविद्यालय से आगे रहने वाले संस्थानों का अनुपात लगभग समान रहा। यह 2026 में 93.8 प्रतिशत से बढ़कर 2027 में 93.9 प्रतिशत दर्ज किया गया।
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