Disaster Awareness in Schools: राजस्थान के झालावाड़ स्कूल जैसी आपदा को रोकने के लिए अब स्कूल और कॉलेज के छात्र भी आपदा-प्रबंधन की पढ़ाई करेंगे। इसमें उन्हें आपदा से बचाव की जानकारी और प्रशिक्षण मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर गृह मंत्रालय युवाओं को आपदाओं से निपटने में सक्षम बनाने की तैयारी कर रहा है। जून में गृह और शिक्षा मंत्रालय की बैठक में शैक्षणिक सत्र 2025-26 में उच्च शिक्षण संस्थानों में स्नातक प्रोग्राम में आपदा प्रबंधन को शामिल किया गया है। इसकी पढ़ाई करने पर छात्र को दो क्रेडिट मिलेंगे। अगले चरण में, सभी स्कूलों को भी इससे जोड़ा जाएगा।
यूजीसी ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को लिखा पत्र
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों और राज्यों को आपदा प्रबंधन को पाठ्यक्रम में जोड़ने के लिए पत्र लिखा है। इसमें आईआईटी, आईआईएम समेत सभी सामान्य विश्वविद्यालय और कॉलेज भी शामिल हैं। गृह मंत्रालय के तहत आने वाले राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) मदद करेगा। इसका मकसद उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में आपदा जोखिम को कम करना है। सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डिजास्टर रिस्क रिडक्शन) क्लब खोले जाएंगे, जहां छात्र और शिक्षक एक साथ काम करेंगे। इसमें व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ क्षमता निर्माण, जोखिम मूल्यांकन, इंटरैक्टिव गतिविधियों के माध्यम से आपदा जागरूकता, आपातकालीन तैयारी आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आग, भूकंप, बाढ़ से बचाव का प्रशिक्षण
छात्रों को आपदा प्रबंधन में व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ पेशेवरों के सहयोग से प्राथमिक चिकित्सा और सीपीआर प्रशिक्षण भी मिलेगा। स्थानीय स्तर पर आग से सुरक्षा अभ्यास और भूकंप की तैयारी पर कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी। छात्रों को आपदा सिमुलेशन अभ्यास करवाया जाएगा। इसके अलावा छात्र पेशेवरों के साथ खुद उच्च जोखिम क्षेत्र की जांच करेंगे। इसका मकसद, स्कूल या कॉलेज भवन समेत आसपास के इलाकों का निरीक्षण करना शामिल है। इसमें आग, भूंकप, बाढ़ में बचाव और जर्जर इमारतों की मैपिंग की जाएगी। ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके।