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DU INMS: दिल्ली विश्वविद्यालय खोलेगा इंस्टीट्यूट ऑफ नैनोमेडिकल साइंस, कैंसर-डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों पर होगा शोध

Tue, 14 Dec 2021 12:18 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Delhi University to set up INMS : दिल्ली विश्वविद्यालय इंस्टीट्यूट ऑफ नैनोमेडिकल साइंस (INMS) खोलने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है। यह संस्थान कैंसर, सिकल सेल रोग, मधुमेह और गुर्दा अनुसंधान जैसी गंभीर बीमारियों पर शोध की सुविधा प्रदान करेगा। 
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DU to set up an Institute of Nanomedical Sciences - फोटो : Social media
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विस्तार
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अपनी उत्कृष्ठता का लोहा दुनियाभर में मनवाने वाला दिल्ली विश्वविद्यालय शीघ्र ही स्वास्थ्य शिक्षा एवं अनुसंधान सेवा क्षेत्र में कदम रखने जा रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय इंस्टीट्यूट ऑफ नैनोमेडिकल साइंस (INMS) खोलने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है। यह संस्थान कैंसर, सिकल सेल रोग, मधुमेह और गुर्दा अनुसंधान जैसी गंभीर बीमारियों पर शोध की सुविधा प्रदान करेगा। इसे दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा ही स्थापित किया जा सकता है।

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दिल्ली यूनिवर्सिटी की 17 दिसंबर को होने वाली एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में इंस्टीट्यूट ऑफ नैनोमेडिकल साइंस (INMS) की स्थापना संबंधी प्रस्ताव आएगा। हालांकि, इससे पहले यह प्रस्ताव अकादमिक परिषद यानी एकेडमिक काउंसिल की बैठक के दौरान आया था और कुछ सदस्यों के विरोध के बावजूद इसे पारित कर दिया गया था। 

INMS विशेषज्ञों को एक साथ लाकर बायोमेडिसिन में क्रांति को सशक्त करेगा

कार्यकारी परिषद के सदस्यों को भेजे गए दस्तावेजों के अनुसार, INMS मिशन-संचालित होगा और दिल्ली विश्वविद्यालय, वेन स्टेट स्कूल ऑफ मेडिसिन और राष्ट्रीय राजधानी के मेडिकल स्कूलों के मेडिसिन, कम्प्यूटेशन, बायोलॉजी और केमिस्ट्री के शोधकर्ताओं को एक साथ लाएगा। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि आईएनएमएस दुनिया भर में चिकित्सा चुनौतियों का समाधान करने के लिए वैज्ञानिकों और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ सहयोग करने में शामिल होगा। यह कैंसर, सिकल सेल रोग, मधुमेह और गुर्दा अनुसंधान आदि सहित क्षेत्रों में अनुसंधान कार्यों के विस्तार के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ बनाने और समन्वय बनाए रखने के लिए काम करेगा। इसमें कहा गया है, आईएनएमएस बायोमेडिसिन में क्रांति को सशक्त करेगा, जिससे दुनिया में बीमारी पर विजय पाने की गति तेज हो सके।

डीओटी और डीआरडीओ सचिव समेत ये होंगे गवर्निंग बॉडी में शामिल

दस्तावेज में कहा गया है कि INMS के शासी निकाय के सदस्यों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DOT) के सचिव, DRDO सचिव, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सचिव, के साथ ही स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव सहित अन्य विशेषज्ञ और उच्चाधिकारी शामिल होंगे। इसमें नैनोमेडिसिन के क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। गवर्निंग बॉडी का काम आईएनएमएस को विशेष शोध के मामलों में सलाह देने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड का गठन करना होगा और इसके सदस्य वे हो सकते हैं जो अपने क्षेत्र में नेतृत्वकर्ता हैं और एक या दो नोबेल पुरस्कार विजेताओं सहित जो पहले से डीयू से जुड़े नहीं हैं।
 

शोध सलाहकार परिषद भी गठित होगी

संस्था संस्थान के लिए एक शोध सलाहकार परिषद भी गठित करेगी जो अनुसंधान में सहयोग करने और परियोजनाओं के लिए धन प्राप्त करने में मदद करेगी। इसके सदस्य रॉकफेलर फाउंडेशन, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और टाटा फाउंडेशन आदि जैसे संगठनों से जुड़े हो सकते हैं, जो पहले से डीयू से जुड़े नहीं हो। दस्तावेज में कहा गया है कि इसके काम में विजिटिंग प्रोफेसरों या फेलो, सहायक प्रोफेसरों या फेलो, प्रतिष्ठित प्रोफेसरों, मानद प्रोफेसरों, प्रोफेसर एमेरिटस और संबद्ध संकाय की नियुक्ति भी शामिल होगी। 
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प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को किया जाएगा नियुक्त

निदेशक/ गवर्निंग बॉडी द्वारा राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और उद्योगों में काम करने वाले व्यक्तियों, वरिष्ठ वैज्ञानिकों और दुनिया भर में अपने क्षेत्रों में अग्रणी को अतिथि संकाय / साथी आदि के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। नैनोमेडिसिन और नैनो प्रौद्योगिकी और संबद्ध क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को प्रोफेसर और लाइफटाइम के लिए प्रोफेसर एमेरिटस के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।
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