शिक्षकों की वरिष्ठता निर्धारित करने के नियम पारित
दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों और संबंधित कॉलेजों संस्थानों के विभागों में शिक्षकों (सहायक प्रोफेसर) की वरिष्ठता के लिए नियमों को कार्यकारी परिषद ने पास कर दिया है। यदि उम्मीदवार की सभी योग्यताएं समान हैं, तो शिक्षकों की वरिष्ठता आयु-जन्म तिथि के आधार पर निर्धारित की जा सकती है। इस मामले को लेकर डीयू डीन ऑफ कॉलेजिज प्रो. बलराम पाणी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था।
समिति की विस्तृत रिपोर्ट पर विचार करने के उपरांत यह नियम पारित किए गए हैं। जो शिक्षक उम्र में बड़ा है उसे उस शिक्षक से वरिष्ठ माना जाएगा जो उम्र में छोटा है और यदि उम्र भी समान है, तो वरिष्ठता एपीआई स्कोर के आधार पर निर्धारित की जाएगी। डीयू कार्यकारी परिषद सदस्य अमन कुमार ने बताया कि वरिष्ठता नियमों को लेकर उन्होंने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। इसके साथ ही उन्होंने एसओएल के एसएलएम को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई कि इसकी क्वालिटी ठीक नहीं है, और इसके लिए एक कमेटी बनाई जाए।
विभिन्न प्रोग्रामों के पाठ्यक्रमों को भी ईसी से मिली मंजूरी
बैठक में विभिन्न प्रोग्रामों के पाठ्यक्रम को भी ईसी द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई। बीती 10 मई को हुई अकादमिक परिषद की बैठक में की गई सिफारिशों के बाद इन्हें ईसी से भी मंजूरी मिल गई। इसके तहत कई पाठ्यक्रमों के मौजूदा सीबीसीएस, एलओसीएफ आधारित पाठ्यक्रम परीक्षा योजनाओं को संशोधित स्नातक पाठ्यक्रम रूपरेखा-2022, स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम रूपरेखा-2024 पाठ्यक्रम-परीक्षा योजनाओं के अनुरूप अनुमोदन किया गया।
डीयू में हिंदी व अंग्रेजी विभाग में पत्रकारिता में एमए की पढ़ाई होगी
दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी और अंग्रेजी विभागों में भी अब पत्रकारिता में एमए की पढ़ाई करवाई जाएगी। अकादमिक परिषद से मंजूरी मिलने के बाद इसे कार्यकारी परिषद ने भी मंजूरी दे दी। बीते दिनों डीयू के दक्षिणी परिसर के पत्रकारिता विभाग में स्टूडियो का उद्घाटन करते हुए कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने घोषणा की थी। पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए डीयू के दक्षिणी दिल्ली परिसर के निदेशक प्रो. श्री प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है।
एनईपी 2020 में सर्टिफिकेट से लेकर डिग्री मिलने का नियम: कुलसचिव
कार्यकारी परिषद की बैठक में कुलसचिव डॉ. विकास गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 में अच्छे प्रावधान है। इसमें बीच में कोर्स छोड़ने पर छात्रों को सर्टिफिकेट से लेकर डिग्री तक मिलती है। एनईपी 2020 में हर स्नातक (यूजी) कोर्स 4 साल का ही है लेकिन इसमें विद्यार्थियों के पास मल्टीपल एक्जि़ट और मल्टीपल एंट्री का विकल्प उपलब्ध है। वो जब चाहें छोड़ कर जा सकते हैं। पहले की एजुकेशन पॉलिसी में 3 वर्ष के कोर्स को बीच में छोड़ने पर विद्यार्थियों को कुछ नहीं मिलता था।