विश्वविद्यालय के पोस्ट ग्रेजुएट पुरुष छात्रावास में छह टाइप-1 क्वार्टर का नवीनीकरण पूरा हो चुका है। इनको दो नवंबर से छात्रों के रहने के लिए उपलब्ध कराने की योजना है। आवास की कमी दूर करने के लिए गठित आठ सदस्यीय समिति ने रीड्स लाइन और ढाका परिसर में खाली पड़े क्वार्टर का नवीनीकरण कर उन्हें छात्रों के उपयोग में लाने की सिफारिश की है। इनमें टाइप-1 क्वार्टर में एक कमरा, रसोई और बाथरूम की सुविधा है। छात्र साझा व्यवस्था के तहत रह सकेंगे।
विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग को विभिन्न परिसरों में खाली पड़े अन्य क्वार्टर का सर्वे करने की जिम्मेदारी दी गई है। विश्वविद्यालय मौजूदा छात्रावासों की क्षमता बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है। जहां संभव होगा, एक कमरे में दो छात्रों को ठहराने की व्यवस्था की जा सकती है।
छात्रों के आवास की स्थिति जानने के लिए पोर्टल हो रहा तैयार
इसके अलावा छात्रों के आवास की स्थिति जानने के लिए ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया जा रहा है। जिससे उनके परिवार के रहने और पीजी में रहने के संबंध में जानकारी मिल सकेगी। साथ ही पीजी में सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा में भी मदद मिलेगी। समिति ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों की सरकारों से छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संपर्क करने का सुझाव भी दिया है। नए छात्रावासों का निर्माण सरकारी मंजूरी और बजट पर निर्भर करेगा।
नए छात्रावास कब बन सकेंगे?
समिति ने सुझाव दिया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय को हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों की सरकारों से संपर्क करना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने पर विचार किया जा सके। दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी दिल्ली में पढ़ने आते हैं, इसलिए उनके रहने की व्यवस्था एक अहम जरूरत है। हालांकि, नए छात्रावासों का निर्माण सरकारी मंजूरी और बजट उपलब्ध होने पर निर्भर करेगा। फिलहाल विश्वविद्यालय खाली पड़े क्वार्टर का सर्वे, नवीनीकरण और मौजूदा छात्रावासों की क्षमता बढ़ाने जैसे विकल्पों पर काम कर रहा है। विद्यार्थियों को कमरों के आवंटन और आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना चाहिए।