पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने पर भी रोक
जारी आदेश के अनुसार, पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने, नारे लगाने, भाषण देने तथा किसी भी प्रकार की खतरनाक सामग्री जैसे मशाल या बीकन/टॉर्च लेकर चलने पर प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और एक महीने तक प्रभावी रहेगा, जब तक इसे पहले वापस न लिया जाए।
डीयू के प्रॉक्टर मनोज कुमार ने बयान में कहा कि पहले भी ऐसे कई मौके आए हैं जब आयोजक प्रदर्शनों को नियंत्रित नहीं कर पाए, जिससे स्थिति बिगड़ी और विश्वविद्यालय परिसर में कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई।
फैसले पर उठे सवाल
हालांकि, इस निर्णय को लेकर आपत्ति भी सामने आई है। हंसराज कॉलेज के अंग्रेजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और डीयू की कार्यकारी परिषद के सदस्य मिथुराज धूसिया ने इसे 'पूरी तरह से व्यापक प्रतिबंध' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह सही है कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने चाहिए और विश्वविद्यालय को व्यवस्था बनाए रखनी चाहिए, लेकिन 'यातायात बाधा' को आधार बनाकर सभाओं पर पूरी तरह रोक लगाना स्वीकार्य नहीं है।
धूसिया ने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन नियुक्तियों, नई शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन, यूजीसी इक्विटी बिल और हाल में शिक्षकों के निलंबन जैसे मुद्दों पर हो रही लामबंदी को रोकना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रॉक्टर कार्यालय एकतरफा तरीके से सार्वजनिक बैठकों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगा सकता और आदेश वापस लेने की मांग की।
यह आदेश ऐसे समय में आया है जब हाल के दिनों में परिसर में विवादित घटनाएं सामने आई थीं। पिछले सप्ताह दिल्ली पुलिस ने एक विरोध कार्यक्रम के दौरान दो छात्र समूहों के बीच हुई झड़प के बाद दो एफआईआर दर्ज की थीं। इसके अलावा, 12 फरवरी को एक सामाजिक न्याय कार्यक्रम में बोलते समय इतिहासकार इरफान हबीब पर पानी से भरी बाल्टी फेंके जाने की घटना भी हुई थी।
इन घटनाओं के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाने की बात कही है।