एआई-सक्षम शिक्षा सरकार की जिम्मेदारी
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नई पीढ़ी को एआई-सक्षम शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उनके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित यह समिट युवाओं में नई ऊर्जा और उत्साह भर रहा है। बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक और विशेषज्ञ इसमें भाग ले रहे हैं।
दो अहम पहलुओं पर समिट का फोकस: शिक्षा मंत्री
उन्होंने स्पष्ट किया कि समिट का मुख्य फोकस दो अहम पहलुओं पर है - 'एआई इन एजुकेशन' और 'एजुकेशन इन एआई'। यानी शिक्षा में एआई का उपयोग भी जरूरी है और छात्रों को एआई की पढ़ाई भी करनी होगी। उनका कहना था कि भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली से लेकर वैश्विक ज्ञान तक, एआई के माध्यम से छात्रों और शिक्षकों को सशक्त बनाया जा सकता है। साथ ही स्कूल और कॉलेज प्रबंधन प्रणाली को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी कहा कि दुनिया आज भारत को ऐसे देश के रूप में देख रही है जो तेजी से एआई को अपना रहा है। उनके मुताबिक, एआई भारत को वैश्विक ज्ञान शक्ति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में मदद करेगा।
नीति से लेकर संस्थान तक बदलाव पर चर्चा
समिट में आयोजित एक महत्वपूर्ण सत्र 'मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन: पुशिंग द फ्रंटियर ऑफ एआई इन इंडिया' में नीति, तकनीक और संस्थागत स्तर पर बड़े बदलावों की संभावनाओं पर चर्चा हुई। शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च और तकनीकी शिक्षा तक एआई के उपयोग को लेकर विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई है। इसके लिए शिक्षा जगत, उद्योग और स्टार्टअप्स के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया है।
एआई का शिक्षा पर गहरा और व्यापक प्रभाव पड़ेगा: जयंत चौधरी
जयंत चौधरी ने कहा कि एआई का शिक्षा पर गहरा और व्यापक प्रभाव पड़ेगा। इसके लिए शिक्षकों की क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान देना होगा और शैक्षणिक ढांचे को नए सिरे से तैयार करना होगा। उन्होंने बताया कि शुरुआती शिक्षा से लेकर कौशल विकास, शोध और वैश्विक नेतृत्व तक, हर स्तर पर एआई को व्यवस्थित रूप से जोड़ने पर चर्चा हुई।
उन्होंने शिक्षा मंत्रालय और स्किल इंडिया के पवेलियन का भी उल्लेख किया, जहां भारत में विकसित और जमीनी स्तर पर लागू हो रहे एआई समाधान प्रदर्शित किए गए।
आईआईटी मद्रास को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की जिम्मेदारी
जयंत चौधरी ने जानकारी दी कि इसी उद्देश्य से आईआईटी मद्रास को एआई और शिक्षा के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह केंद्र अध्ययन करेगा कि एआई शिक्षा पर किस प्रकार प्रभाव डाल सकता है, देश की तैयारी किस स्तर पर है और भविष्य के लिए किन सुधारों की आवश्यकता होगी।
एआई शिक्षा में चार स्तरों पर बदलाव ला सकता है: आईआईटी मद्रास के निदेशक
आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि ने बताया कि समिट में 'एआई फॉर एजुकेशन' और 'एजुकेशन ऑफ एआई' पर विशेष चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि एआई शिक्षा क्षेत्र में चार स्तरों पर बदलाव ला सकता है।
- पहला, छात्र एआई टूल के माध्यम से बिना झिझक सवाल पूछ सकते हैं और तुरंत उत्तर पा सकते हैं, जिससे उनकी समझ बेहतर होगी।
- दूसरा, एआई अभिभावकों को यह समझने में मदद कर सकता है कि उनके बच्चों की रुचि और प्रतिभा किस क्षेत्र में है, जैसे संगीत, खेल, फोटोग्राफी या ड्राइंग। इससे करियर मार्गदर्शन में सहायता मिलेगी।
- तीसरा, शिक्षकों को यह पहचानने में मदद मिलेगी कि कौन-सा छात्र किस विषय में कमजोर है और किस प्रकार के प्रशिक्षण की जरूरत है।
- चौथा, नीति निर्माताओं को गांव, जिला और राज्य स्तर पर शिक्षा की स्थिति का विश्लेषण कर बेहतर नीतियां बनाने में सहायता मिलेगी।
पिछले वर्षों की तैयारी और आगे की दिशा
पिछले दस वर्षों में शिक्षा मंत्रालय ने डिजिटल प्लेटफॉर्म, नई नीतियों, संस्थागत सुधारों और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से एआई आधारित शिक्षा की नींव मजबूत की है। पिछले बजट के बाद आईआईटी मद्रास में 'एआई फॉर एजुकेशन' का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया।
हाल ही में 'भारत बोधन एआई कॉन्क्लेव 2026' का आयोजन भी किया गया, जिसमें जिम्मेदार एआई के उपयोग पर जोर दिया गया। शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि अब केवल योजना बनाने का समय नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर उसे लागू करने का समय है।