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DU University: सत्र 2022-23 में कैसी होगी प्रवेश प्रक्रिया, क्या हैं मौजूदा विकल्प? जानिए सबकुछ

Fri, 10 Dec 2021 11:01 AM IST
वर्तिका तोलानी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

DU Entrance Exam 2022: दिल्ली विश्वविद्यालय के स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले के चार विकल्प प्रस्तुत किए गए हैं। हालांकि अभी तक किसी भी विकल्प पर मुहर नहीं लगी है। इसका फैसला आज एकेडमिक काउंसिल की बैठक में किया जाएगा। यदि आप भी डीयू में प्रवेश के सपने देख रहे हैं तो इन विकल्पों के बारे में जानना आपके लिए बेहद जरूरी है। पढ़िए...
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DU Admissions 2022-23 - फोटो : Social Media
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विस्तार
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दिल्ली विश्वविद्यालय के शैक्षणिक सत्र 2022-23 में प्रवेश के लिए बोर्ड और प्रवेश परीक्षा के अंकों को आधार बनाया जा सकता है। जिसमें बोर्ड परीक्षा और प्रवेश परीक्षा के अंकों का 50-50 फीसदी वेटेज लिया जा सकता है। हालांकि अभी तक प्रवेश परीक्षा को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है। आज यानी शुक्रवार को एकेडमिक काउंसिल (एसी) की बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। 

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किन विकल्पों पर हो रही है चर्चा?

<p dir="ltr">कट-ऑफ आधारित प्रवेश की वर्तमान प्रणाली "सख्त" अंकन नीतियों वाले बोर्ड के छात्रों को नुकसान में डालती है। यह बात न्यूज एजेंसी पीटीआई को विश्वविद्यालय के हाल ही में नियुक्त कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने कही। प्रोफेसर सिंह बताते हैं कि हमारे पास प्रवेश के लिए कई विकल्प हैं - पहला मौजूदा प्रणाली को जारी रखा जाए, दूसरा विभिन्न बोर्डों के अंकों का सामान्यीकरण कर प्रवेश दिया जाए, तीसरा प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाए और चौथा प्रवेश परीक्षा व बोर्ड का 50 फीसदी वेटेज लिया जाए।</p>

क्या है समिति का मत, क्यों हुआ नौ सदस्यीय पैनल का गठन?

<p dir="ltr">प्रोफेसर सिंह द्वारा गठित नौ सदस्यीय पैनल ने स्नातक प्रवेश प्रक्रिया में 'पर्याप्त वस्तुनिष्ठता (सब्सटेंशियल ऑब्जेक्टिव)' सुनिश्चित करने के लिए डीयू को एक सामान्य प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की सिफारिश की। समिति का गठन स्नातक पाठ्यक्रमों में अधिक और कम प्रवेश के कारणों की जांच करने, प्रवेश के बोर्ड-वार वितरण का अध्ययन करने और अन्य के बीच इष्टतम प्रवेश के लिए वैकल्पिक रणनीतियों का सुझाव देने के लिए किया गया था। समिति ने पाया कि इस साल छात्रों का सबसे अधिक प्रवेश सीबीएसई बोर्ड से है, इसके बाद केरल बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन, बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन, हरियाणा, आईसीएसई और बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन राजस्थान।</p>

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प्रोफेसर सिंह क्यों हैं मौजूदा प्रणाली के खिलाफ?

<div><meta>पीटीआई साक्षात्कार के दौरान, प्रो सिंह ने कहा कि वह कट-ऑफ आधारित प्रवेश के पक्ष में नहीं हैं। ऐसी प्रणाली में, "लचीली" अंकन प्रणाली वाले बोर्डों के छात्रों को दूसरों पर एक फायदा होता है, वहीं सख्त बोर्डों के छात्रों को नुकसान हो रहा है। उदाहरण के लिए, यूपी बोर्ड के छात्रों को दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश नहीं मिल रहा है। यहां तक कि हरियाणा बोर्ड और पड़ोसी राज्यों के छात्रों को भी यहां प्रवेश नहीं मिल रहा है। लेकिन केरल से बड़ी संख्या में छात्र यहां प्रवेश ले करे हैं, हालांकि तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश से आने वाले छात्रों की संख्या बहुत कम है। यह अच्छी बात है कि हम केरल में लोकप्रिय हैं, लेकिन हमें इसे (बोर्ड के अन्य छात्रों को डीयू में प्रवेश नहीं मिल रहा है) हल करने की जरूरत है।</div>

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