सूद ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में बताया, "इस स्कूल में 1:1 क्रोमबुक क्लासरूम, जिज्ञासा आधारित शिक्षण पद्धति, लचीले शिक्षण कक्ष और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया जाता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सार्वजनिक शिक्षा को भी आधुनिक और न्यायसंगत बनाया जा सकता है।"
उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और गूगल यूके की टीम से मुलाकात कर यह समझने का प्रयास किया कि इस तरह के शैक्षणिक मॉडल कैसे दिल्ली के सीएम श्री स्कूलों में चल रहे बदलाव को और बेहतर बना सकते हैं।
लंदन यात्रा के दौरान सूद ने Google Accessibility Discovery Centre का भी दौरा किया, जहां उन्होंने यह जाना कि कैसे समावेशी तकनीक दिव्यांगजन और सेरेब्रल डिसएबिलिटी से ग्रस्त विद्यार्थियों की शिक्षा को आसान बना रही है।
उन्होंने कहा, "हमने देखा कि सहायक तकनीक कैसे SEND (Special Educational Needs and Disabilities) छात्रों की सहायता कर रही है। शिक्षक विभिन्न प्रमाणन माध्यमों से अपने कौशल को बढ़ा रहे हैं और डिजिटल टूल्स की मदद से शिक्षा को वैयक्तिकृत कर बच्चों की मूलभूत साक्षरता को मज़बूत किया जा रहा है।"
सूद ने बताया कि चिन-नियंत्रित जॉयस्टिक, आंखों से नियंत्रित होने वाले गेम जो मोटर स्किल्स को विकसित करते हैं, लाइव कैप्शनिंग और स्क्रीन रीडर जैसी तकनीकों की मदद से अब शिक्षा में समावेशिता को एक नई परिभाषा दी जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार ऐसी सहायक तकनीकों को अपने स्कूलों और सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि कोई भी छात्र शिक्षा से वंचित न रह जाए।
इसके पहले 28 जून को सूद ने गुजरात के सूरत शहर के कुछ स्कूलों का दौरा किया था। वहां उन्होंने स्मार्ट बोर्ड्स के माध्यम से हो रही कक्षा शिक्षण प्रक्रिया को देखा और छात्रों से बातचीत की, ताकि यह समझा जा सके कि डिजिटल टूल्स उनके सीखने पर किस प्रकार सकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं।
सूरत के दौरे के दौरान उन्होंने स्कूल के AI और रोबोटिक्स लैब का भी निरीक्षण किया, जहां छात्रों को ड्रोन, 3D प्रिंटर और आधुनिक सेंसर-आधारित सुरक्षा प्रणालियों पर प्रायोगिक कार्य करते देखा।
सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार जल्द ही गुजरात की तर्ज पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट बोर्ड्स और रोबोटिक्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को दिल्ली के सरकारी स्कूलों में लागू करेगी।