अदालत ने आदेश में कहा है कि यह न्यायालय सीएसएएस प्रणाली के साथ हस्तक्षेप करने के लिए कोई आधार नहीं पाता है। याचिकाकर्ताओं को ऐसी राहत की मांग करने का कोई अधिकार नहीं है। हालांकि, न्यायालय यह मानता है प्रतिवादियों दिल्ली विश्वविद्यालय और सेंट स्टीफंस कॉलेज को इसे एकबारगी मामला मानते हुए छूट दे देना चाहिए।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की सामान्य सीट आवंटन प्रणाली (CSAS) को चुनौती निराधार थी और यह मानने का कोई कारण नहीं था कि यह मनमाना, अनुचित और संविधान के अनुच्छेद-14 या अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ताओं के अनुरोधों पर विचार किया जाता है, तो यह एक मिसाल नहीं बनेगा। अदालत का यह भी विचार है कि यदि अन्य छात्रों के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है, तो प्रतिवादियों यानी डीयू और सेंट स्टीफंस कॉलेज को याचिकाकर्ताओं द्वारा किए गए अनुरोध पर विचार करना चाहिए।