मामला क्या है?
यह याचिका आदिति रावत ने दाखिल की थी, जो कि सीबीएसई की नेशनल लेवल लॉन टेनिस गोल्ड मेडलिस्ट हैं। नाबालिग आदिति की ओर से उनकी मां अनीता रावत ने याचिका दायर की। इसमें 2025-26 शैक्षणिक सत्र के लिए हिंदू कॉलेज में खेल कोटे के तहत सीट की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता की दलील
आदिति रावत के वकील जितेंद्र गुप्ता, भारत रावत और आशीष मिश्रा ने दलील दी कि DU की प्रवेश नीति के अनुसार प्रत्येक कॉलेज में कुल सीटों का 5% हिस्सा ECA और खेल कोटे के लिए आरक्षित होना चाहिए। जबकि हिंदू कॉलेज ने 956 सीटों में से केवल 10-10 सीटें ECA और खेल कोटे के लिए रखीं, जो कि निर्धारित 47 सीटों से काफी कम हैं।
हिंदू कॉलेज का पक्ष
हिंदू कॉलेज की ओर से कहा गया कि DU की सूचना पुस्तिका (Information Bulletin) में जो कोटा बताया गया है, वह अनिवार्य नहीं है।
विश्वविद्यालय और कोर्ट की राय
दिल्ली विश्वविद्यालय ने अदालत में हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया कि सभी कॉलेजों को 5% आरक्षण का पालन करना अनिवार्य है। न्यायमूर्ति विकास महाजन ने कहा कि विश्वविद्यालय के हलफनामे के बाद कोई संदेह नहीं बचता कि यह कोटा लागू करना जरूरी है।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र के लिए खेल सुपरन्यूमेरेरी कोटे की प्रवेश प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। ऐसे में फिलहाल याचिकाकर्ता को राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि उन्हें पहले ही लेडी श्रीराम कॉलेज में खेल कोटे के तहत प्रवेश मिल चुका है।
स्पॉट एडमिशन पर स्पष्टीकरण
सुनवाई के दौरान वकील गुप्ता ने यह भी कहा कि डीयू ने स्पॉट एडमिशन की सार्वजनिक सूचना जारी की है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह नोटिस केवल नियमित सीटों के लिए है, सुपरन्यूमेरेरी ECA/खेल कोटे पर लागू नहीं होगा।
याचिकाकर्ता की ओर से भविष्य में नियमों के पालन की मांग की गई, जिसे डीयू के वकील ने भी समर्थन दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि आने वाले समय में सभी कॉलेज डीयू की सूचना पुस्तिका के अनुसार ECA और खेल कोटे में अनिवार्य 5% आरक्षण सुनिश्चित करें।