दिल्ली सरकार ने निजी गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूलों को EWS और फ्रीशिप श्रेणी में कक्षा 2 और उससे आगे की खाली सीटों की जांच करने को कहा है। इन सीटों पर विद्यार्थियों को दाखिला कंप्यूटरीकृत लॉटरी के जरिए दिया जाएगा।
अल्पसंख्यक स्कूलों को छोड़कर सभी स्कूलों को खाली सीटों की जानकारी जांचनी होगी। किसी भी गलती या अंतर की जानकारी संबंधित शिक्षा क्षेत्र को गुरुवार तक देनी होगी। इसके बाद जिला उप शिक्षा निदेशक इन मामलों की जांच कर 5 सितंबर तक अपनी सिफारिश भेजेंगे।
निदेशालय ने कहा कि यदि निर्धारित समय के भीतर किसी विद्यालय से कोई अभ्यावेदन प्राप्त नहीं होता है, तो रिक्तियों के आंकड़ों को सही माना जाएगा और उम्मीदवारों को कम्प्यूटरीकृत ड्रॉ के माध्यम से सीटें आवंटित की जाएंगी।
लॉटरी से चुने छात्रों को देना होगा दाखिला
विभाग ने कहा कि 'सीट खाली न होने' (no vacancy) का हवाला देकर, 'ड्रॉ ऑफ लॉट्स' (लॉटरी) के जरिए चुने गए उम्मीदवारों को एडमिशन देने से स्कूलों को मना करने की इजाजत नहीं होगी।
विभाग ने आगे कहा कि जो स्कूल इस आधार पर एडमिशन देने से मना करेंगे, उनके खिलाफ 'दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट एंड रूल्स, 1973' और 'राइट टू एजुकेशन एक्ट, 2009' के संबंधित प्रावधानों के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी।
यह कदम दिल्ली हाई कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद उठाया गया है जो 'जस्टिस फॉर ऑल बनाम डायरेक्टरेट ऑफ एजुकेशन' मामले में की गई थी। कोर्ट ने कहा था कि क्लास 2 और उससे ऊपर की क्लास में EWS कैटेगरी के तहत खाली सीटों को भरा जाना चाहिए।