IBPS क्लर्क की तैयारी कर रहे छात्रों को सबसे ज्यादा कठिन विषय गणित (क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड) लगता है। कुछ छात्रों को फॉर्मूलों को याद रखने में कठिनाई होती है तो कुछ छात्र पूरे सिलेबस को कवर करने में ही विफल हो जाते हैं। आज हम इस ब्लॉग में आपकी सारी कठिनाइयों को दूर करने का काम करेंगे। यहां हम आपको कुछ ऐसे टिप्स देंगे जिसकी मदद से आप IBPS क्लर्क की प्रीलिम्स की परीक्षा में आसानी से 35 में से 35 अंक हासिल कर सकते हैं।
किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू करने से पहले उसके पूरे सिलेबस की जानकारी जरूर हासिल कर लें। आप जब सिलेबस को बेहतर तरीके से समझ लेते हैं तो आप यह अंदाजा लगा लेंगे कि उनमें दिए हुए टॉपिक्स में कौन से टॉपिक आपने पहले से पढ़े हुए हैं। साथ ही आप यह भी तय कर सकेंगे कि किस टॉपिक को कितना समय देना है। बता दें कि IBPS क्लर्क की परीक्षा में गणित सेक्शन में पूछे जाने वाले सवाल बेसिक लेवल के होते हैं। गणित सेक्शन के सिलेबस:
सिलेबस की पूरी जानकारी होने के बाद आपको एक प्रॉपर प्लानिंग के साथ स्टडी शेड्यूल बनाना होगा। आपको यह ध्यान रखना होगा कि कौन से टॉपिक पर आपको कितना समय देना है। कभी-कभी छात्रों का पूरा समय यह निर्धारित करने में निकल जाता है कि पढ़ाई कैसे करें। आपको ज्यादा किताबों की जरूरत नहीं है। कुछ सिलेक्टेड किताबों की मदद लें। याद रखें कि अगर आप ज्यादा तरह की किताबों को पढ़ने की कोशिश करते हैं तो आप वक़्त तो बर्बाद करेंगे ही, कन्फ्यूज़न भी पैदा कर लेंगे।
गणित विषय प्रैक्टिस का विषय है। इसको रट्टा मारकर नहीं तैयार कर सकते। आपको गणित सेक्शन को अगर बेहतर तरीके से तैयार करना है तो रोजाना प्रैक्टिस करें। कम से कम दिन भर में 3 घंटे का समय प्रैक्टिस के लिए निकालें। आप जब नए टॉपिक्स को पढ़ते हैं तो आप अगर प्रैक्टिस नहीं करेंगे तो उसे थोड़ी देर बाद भूल जाएंगे। ज्यादातर छात्र कई सारी चीजों को पढ़ने के चक्कर में प्रैक्टिस पर फोकस नहीं करते हैं और परिणाम नकारात्मक हो जाता है।
प्रैक्टिस के लिए सबसे अच्छा साधन है पुराने कुछ सालों के पेपर को सॉल्व करना। इसके लिए आपको विगत 10 वर्षों के प्रश्नपत्रों को इकट्ठा करना होगा और उसे नियम से रोजाना सॉल्व करना होगा। इससे आपको परीक्षा के सही पैटर्न की भी जानकारी होगी। साथ ही आप पेपर सॉल्व करने के स्पीड भी बढ़ा सकते हैं।
ज्यादातर छात्र गणित सेक्शन में इसलिए घबराते हैं कि वो अंतिम परीक्षा के वक़्त ही फॉर्मूलों को भूल जाते हैं। जिससे वो गलत फॉर्मूला लगाकर गलत जवाब लिखकर आते हैं। गलत जवाब देने से यहां आपको नेगेटिव मार्किंग का शिकार होना पड़ता है। इसके लिए आपको फॉर्मूलों की एक लिस्ट तैयार करनी होगी। जिसको जब आप प्रैक्टिस करते हैं उस वक़्त सामने रखना होगा। इससे आपको प्रैक्टिस में भी मदद मिलेगी और आप अंतिम परीक्षा के वक़्त फॉर्मूलों को भूलेंगे भी नहीं।