कर्नाटक में 33 मेडिकल छात्र हुए कोरोना संक्रमित
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कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से 65 किलोमीटर दूर कोलार जिले के एक मेडिकल कॉलेज में कोविड -19 संक्रमण के मामले सामने आए हैं। शनिवार 25 दिसंबर,2021 को जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ चरणी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के 33 छात्रों को एक अस्पताल में अलग-अलग आइसोलेट किया है। यह सभी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। कर्नाटक में मौजूदा हालातों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चिंताजनक है। अभी तक लगातार राज्य में मामले बढ़ते जा रहे हैं। इसे देखते हुए राज्य स्तर में स्वास्थ्य कर्मियों समेत डॉक्टरों की तरफ से लगातार लोगों को एहतियातन कदम उठाने के लिए कहा जा रहा है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई रविवार तक कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट के लगातार बढ़ते मामलों पर विशेषज्ञों के साथ अहम समीक्षा बैठक में हिस्सा लेंगे। इसमें कर्नाटक राज्य में कर्फ्यू को लेकर कोई फैसला होने की संभावना है।
7 हजार से ज्यादा कोरोना के मामले राज्य में सक्रिय
कर्नाटक में वर्तमान स्थित के तहत 24 दिसंबर, 2021 तक राज्य में 7,251 सक्रिय कोविड-19 के मामले दर्ज हो चुके हैं। कर्नाटक के पड़ोसी राज्यों केरल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने ओमिक्रॉन वैरिएंट में वृद्धि के संबंध में कार्रवाई पर निर्णय लेने के लिए रविवार को विशेषज्ञों के साथ समीक्षा बैठक में हिस्सा लेने का फैसला किया है।
तेलंगाना में 43 मेडिकल छात्र कोरोना संक्रमित
वहीं, तेलंगाना में 43 मेडिकल छात्रों कोविड-19 संक्रमित हो चुके हैं। यह सभी छात्र, करीमनगर के चलमेडा आनंद राव आयुर्विज्ञान संस्थान के हैं। छात्रों ने संस्थान के परिसर में आयोजित वार्षिक दिवस समारोह में हिस्सा लिया था। इस घटना के बाद कॉलेज और छात्रावास को बंद कर दिया गया है।
कई शिक्षण कर्मचारियों की कोरोना से मृत्यु हो चुकी है
हाल ही में, केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष सरकार ने राज्यसभा सूचना दी थी कि केंद्रीय विद्यालयों, जवाहर नवोदय विद्यालयों और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के कुल 327 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की कोरोना महामारी में कोविड-19 संक्रमण के कारण मृत्यु हो गई। अप्रैल-मई, 2021 में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान कई स्कूलों, कॉलेज और विश्वविद्यालय के शिक्षकों की मौत हुई थी। उस दौरान मेडिकल छात्र भी काफी दबाव में थे क्योंकि उन्हें कोविड ड्यूटी सौंपी गई थी। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए कोविड ड्यूटी अनिवार्य कर दी थी।