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कोरोना वायरस: यदि महामारी फैलाने की कोशिश की तो हो जाएगी जेल, जानें ये कानून

Tue, 24 Mar 2020 12:25 PM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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corona virus
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हमारी दुनिया एक बड़े संकट से जूझ रही है। कोरोना वायरस ने लोगों को घरों में रहने पर मजबूर कर दिया है। इस महामारी से अपने देश को बचाने के लिए सरकार अपने अपने स्तर पर प्रयास कर रही हैं। लेकिन आपने सुना होगा कुछ लोग अपनी लापरवाही के चलते इस संक्रमण को फैला रहे हैं। आपको बतादें कि भारतीय दंड संहिता की धारा 269 और 270 के अधीन संक्रमण को फैलाना एक दंडनीय अपराध है। पुलिस दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कर सकती है। यदि किसी पर ये धारा लगती है तो उसे 2 साल तक का कारावास दिया जा सकता है। इससे अलग एक अधिनियम भी बनाया गया है जो 123 वर्ष पुराना है।
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आखिर कौन सा है वो अधिनियम? क्या है अधिनियम का विस्तार? इसके अंतर्गत कैन-कौन से अधिकार मिलते हैं? इन सभी सवालों के जवाब आपको आगे की स्लाइड में मिल जाएंगे। पढ़ते हैं आगे...
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  • अधिनियम का नाम है महामारी अधिनियम 1897। अधिनियम के प्रावधान देश के अलग-अलग राज्यों में लागू होते हैं।
  • इस अधिनियम का उपयोग तब किया जाता है, जब देश व राज्य कोई बड़े संकट में आने वाला हो। या फिर कोई बीमारी देश या राज्य में घुस कर लोगों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहे हैं।
  • जब ये स्थिति बन जाती है तो सरकार इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू कर सकती है।
  • इस अधिनियम में मात्र 4 धाराएं हैं जो जिसमें सरकार को संपूर्ण अधिकार दिए गए हैं।
  • जब देश किसी बड़ी समस्या में उलझ जाता है और लोगों की जीवनशैली प्रभावित होती है तो सबसे पहले तो राज्य सरकार उन उपबंधों का सहारा लेगी जो साधारण उपबंद हैं। ये वो उपबंध होते हैं, जिनके माध्यम से वह किसी राज्य का संचालन करती है। साथ ही वह साधारण उपबंध जहां पर्याप्त नहीं हैं, वहां पर राज्य सरकार इस अधिनियम का भी उपयोग कर सकती है।
  • इस अधिनियम के मुताबिक, सरकार किसी भी व्यक्ति से ये अपेक्षा कर सकती है कि वे ऐसे काम और उपाय करें, जिससे राज्य में संक्रमण का संचार होना बंद हो जाए।
  • अधिनियम की धारा 2 का उप धारा 2 के मुताबिक, राज्य की सरकार उन लोगों का निरीक्षक कर सकती है जो लोग किसी भी तरह की यात्रा करके आ रहे हैं। इसके लिए सरकार किसी भी तरह की प्रक्रिया का इस्तेमाल कर सकती है।
  • यदि कोई व्यक्ति संक्रमित पाया जाता है तो उसे सबसे दूर ऐसी जगह ले जाया जाता है जहां अस्पताल या अस्थाई केंद्र हों।
  • अधिनियम की धारा 3 की यदि कोई आदेश की अवज्ञा करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188 का मुकदमा दर्ज होगा।
  • ये अधिनियम केंद्र सरकार को सभी हवाई अड्डों के साथ-साथ बंदरगाह तथा भारत में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिए जाने का अधिकार देती है। साथ ही देश में रेल इत्यादि को भी बंद कर देने का अधिकार रखती है।
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