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Study: पानीजन्य रोगों से हो रही है हर वर्ष 22 लाख लोगों की मौत, जानें क्या कहती है रिपोर्ट

Tue, 24 Mar 2020 11:37 AM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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पानी पीते छात्र - फोटो : Social Media
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जल हमारे जीवन के लिए बेहद जरूरी है। जल के बिना जीवन व्यतीत करना नामूमकिन है। ऐसे में जल को बर्बाद होने से बचाना भी हमारा ही फर्ज है। 22 मार्च का दिन विश्व जल दिवस के रूप में मनाया जाता है। साल 1992 में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें पहली बार विश्व जल दिवस मनाया गया। इसके बाद साल 1993 में संयुक्त राष्ट्र ने निर्णय लिया कि इस दिन को वार्षिक दिवस के रूप में मनाया जाएगा। जल संरक्षण का महत्व, साफ पानी की योग्यता आदि को समझाने के लिए इस दिन को पूरा विश्व जल दिवस के रूप में मनाता है।
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दुनिया भर में न जानें कितने शोध जल पर किए गए हैं, जिसमें कई चौंका देने वाले आंकड़ें भी सामने आए हैं। आखिर कहां और कैसे दुनिया और अपने देश में जल को बर्बाद किया जा रहा है? पढ़ते हैं आगे...
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यहां पढ़ें तथ्य-
  • बता दें कि जब हम सामान्य रूप से नहाते हैं तो 100 से 150 लीटर पानी खर्च होता है। वहीं बाथ टब में नहाते समय 300 से 500 लीटर पानी खर्च होता है।
  • आपने देखा होगा कि ब्रश करने के दौरान अकसर पानी का नल खुला रह जाता है इतनी देर में पांच मिनट में करीब 25 से 30 लीटर पानी बर्बाद हो जाता है।
  • दुनियाभर में प्रति 10 व्यक्तियों में से 2 व्यक्ति ऐसे भी हैं जिन्हें शुद्ध पानी पीने के लिए नहीं मिल पाता है। 
  • दुनिया में हर साल पानीजन्य रोगों से 22 लाख लोगों की मौत हो जाती है।
  • ध्यान दें,  देश के 54 फीसदी हिस्से का भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। पिछले 10 वर्षों के में अपने देश की 30 फीसदी नदियां सूख गई हैं।
वॉटर एड संस्था की रिपोर्ट-
दुनियाभर में मौजूद कुल जमीनी पानी में से भारतीय केवल 24 फीसदी पानी ही उपयोग करते हैं। देश में 1170 मिमी औसत बारिश होती है जिसमे से हम केवल 6 फीसदी पानी ही बचा पाते हैं। दुनिया की पूरी आबादी में से भारत में 17 फीसदी आबादी में से सिर्फ 4 फीसदी लोग साफ पानी पी पाते हैं।

नीति आयोग की रिपोर्ट-
जारी हुई रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2030 तक हमारे देश को साफ पीने के पानी, सिंचाई और पानी से जुड़े अन्य संसाधनों के लिए 20 लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी। साथ ही भारत में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता 2025 तक घट कर 1140 क्यूबिक मीटर रह जाएगी।
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