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UK: उत्तराखंड में निजी स्कूलों की फीस वसूली पर सख्ती, सरकार ने बनाई जांच समिति; अभिभावक कर सकेंगे शिकायत दर्ज

Tue, 28 Oct 2025 12:40 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Uttrakhand Private School: उत्तराखंड सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा छात्रों से ली जा रही अत्यधिक फीस की शिकायतों की जांच के लिए एक सलाहकार समिति का गठन किया है। अब अभिभावक सीधे समिति के समक्ष अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे।
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books - फोटो : adobe stock
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विस्तार
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Uttrakhand School: उत्तराखंड सरकार ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि निजी स्कूलों द्वारा छात्रों से अत्यधिक फीस वसूलने की शिकायतों की जांच के लिए एक सलाहकार समिति का गठन किया गया है। 

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राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिभावक अपनी शिकायतें सीधे इस समिति के समक्ष दर्ज करा सकते हैं, ताकि मामलों की निष्पक्ष जांच की जा सके और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित हो।

अदालत हल्द्वानी निवासी दीपचंद्र पांडे द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उत्तराखंड के कई निजी स्कूल छात्रों से अत्यधिक फीस वसूल रहे हैं।

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पहले सलाहकार समिति के समक्ष पेश करें शिकायत: हाईकोर्ट 

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अदालत को सूचित किया कि उसे अभी तक किसी भी छात्र या अभिभावक से कोई शिकायत नहीं मिली है।

नैनीताल के मुख्य शिक्षा अधिकारी, जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए, ने कहा कि राज्य सरकार ने फीस, यूनिफॉर्म, खेल, शैक्षिक यात्राओं और निजी स्कूलों द्वारा छात्रों को एक ही दुकान से किताबें खरीदने के लिए मजबूर करने से संबंधित मुद्दों पर विचार करने के लिए एक समिति का गठन किया है।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद, न्यायमूर्ति रवींद्र मैथानी और न्यायमूर्ति आलोक महारा की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को पहले सलाहकार समिति के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और मामले का निपटारा कर दिया।

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स्कूलों पर महंगी किताबें और यूनिफॉर्म बेचने का आरोप

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि स्कूल प्रबंधन छात्रों को विशिष्ट दुकानों से नोटबुक, किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर करते हैं, जिनकी कीमतें आमतौर पर बाजार मूल्य से अधिक होती हैं।

हालांकि, स्कूल प्रबंधन ने तर्क दिया कि सभी किताबें और अन्य सामग्री एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती हैं ताकि अभिभावकों को अलग-अलग दुकानों के चक्कर न लगाने पड़ें और सत्र समय पर शुरू हो सके।  
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