फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

GNLU: 93% छात्र कॉरपोरेट में कर रहे नौकरी, चीफ जस्टिस ने जताई चिंता; कहा- 'अदालत ही सिखाती है असली वकालत'

Sat, 28 Feb 2026 09:30 PM IST
Akash Kumar एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने जीएनएलयू के दीक्षांत समारोह में कहा कि 93% कानून स्नातकों का कॉरपोरेट में जाना चिंता की बात है। उन्होंने बताया कि किताबों से ज्यादा सीख अदालत में मिलती है और करियर में अपनी भूमिका पहचानना बेहद जरूरी है।
 
विज्ञापन
सूर्यकांत, भारत के मुख्य न्यायाधीश - फोटो : पीटीआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि अगर बड़ी संख्या में कानून के छात्र अदालतों में वकालत करने के बजाय कॉरपोरेट कंपनियों में नौकरी चुन रहे हैं, तो यह स्थिति चिंता पैदा करने वाली है।

विज्ञापन


वह अहमदाबाद में गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (GNLU) के 16वें दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने साफ कहा कि कक्षा में जो पढ़ाया जाता है, वह जरूरी है, लेकिन असली सीख अदालत में काम करने से मिलती है।

93 प्रतिशत छात्र कॉरपोरेट में, सीजेआई ने जताई चिंता

सीजेआई ने कहा, 'जैसा कि जीएनएलयू के कुलपति प्रोफेसर डॉ. एस. शांथाकुमार ने बताया, अगर आपमें से 93 प्रतिशत छात्र विश्वविद्यालय से निकलते ही कॉरपोरेट कंपनियों में चले गए हैं, तो यह मेरी चिंता बढ़ाता है। भारतीय न्यायपालिका का प्रमुख होने के नाते मेरी इच्छा है कि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय ज्यादा से ज्यादा वकील और जज तैयार करें। अदालतों को भी प्रतिभाशाली युवा वकीलों की जरूरत है।'

पढ़ाई और असली वकालत में फर्क

मुख्य न्यायाधीश ने नए कानून स्नातकों को करियर को लेकर सलाह दी। उन्होंने कहा कि कानून की पढ़ाई करना और अदालत में वकालत करना अलग अनुभव है।

उन्होंने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि किताबों में पढ़ा गया कानून और असली पेशे की हकीकत पूरी तरह एक जैसी नहीं होती।

उन्होंने कहा, 'किताबें सिद्धांत सिखाती हैं, लेकिन सीनियर समय-सीमा देते हैं। मूट कोर्ट में आप मेंटर की सुरक्षा में होते हैं, लेकिन असली अदालत में आपको ऐसी परिस्थितियों में बहस करनी पड़ती है जिन्हें आपने चुना नहीं होता।'

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह शिक्षा की कमी नहीं है, बल्कि पढ़ाई और वास्तविक काम के बीच का स्वाभाविक अंतर है।

अनुभव सिखाता है वह जो किताबें नहीं सिखातीं

सीजेआई ने कहा कि शुरुआती साल सबसे ज्यादा सिखाने वाले होते हैं। आप बिना कुछ बोले जजों के रुख को समझना सीखते हैं। आप चिंतित मुवक्किल को भरोसा देना सीखते हैं, भले ही आपके पास सभी जवाब न हों।

आप यह भी सीखते हैं कि सीनियर से असहमति कैसे जताई जाए, बिना संबंध खराब किए। और अगर केस हार भी जाएं, तो मुवक्किल को यह भरोसा दिलाना जरूरी होता है कि सिस्टम की वजह से नुकसान हुआ, न कि आपकी लापरवाही से। उन्होंने कहा कि ये बातें किसी पाठ्यक्रम में नहीं मिलतीं। हर व्यक्ति को खुद समझना पड़ता है कि इस पेशे में उसकी सही जगह क्या है।

टी20 वर्ल्ड कप से समझाया करियर का मंत्र

मुख्य न्यायाधीश ने हाल के टी20 विश्व कप का उदाहरण देते हुए कहा कि सफल टीम वही होती है जहां हर खिलाड़ी से हर काम की उम्मीद नहीं की जाती।

उन्होंने कहा, 'कोई यह उम्मीद नहीं करता कि सूर्यकुमार यादव डेथ ओवरों में गेंदबाजी करें या जसप्रीत बुमराह मैच खत्म करने के लिए बल्लेबाजी संभालें। हर खिलाड़ी से वही काम लिया जाता है जिसमें वह सबसे बेहतर है।' उन्होंने कहा कि यही सिद्धांत वकालत के पेशे में भी लागू होता है।
विज्ञापन

शुरुआत में बस ‘टिके रहने’ की उम्मीद

सीजेआई ने कहा कि करियर की शुरुआत में यह समझ तुरंत नहीं आती। शुरुआती वर्षों में आपसे सिर्फ यह उम्मीद की जाती है कि आप काम संभालते रहें। लेकिन अगर ध्यान से देखें, तो जो लोग आगे बढ़ते हैं, वे हर काम करने की कोशिश नहीं करते। वे अपनी ताकत पहचानते हैं और उसी दिशा में मेहनत करते हैं। इस कार्यक्रम में गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल भी मौजूद थीं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें