इंजीनियरिंग के क्षेत्र में हर साल देश के लाखों छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने जाते हैं। अगर बात आईआईटी की हो तो इसका सपना कौन ही नहीं देखता। हालांकि, देश के सबसे अच्छे संस्थान आईआईटी की भी हालत रोजगार दे पाने में खस्ता हो जा रही है। अगर बात सिविल इंजीनियरिंग की करें तो इसकी हालत और भी खराब है। इस ब्रांच के छात्रों को अन्य ब्रांच के मुकाबले औसत प्लेसमेंट मिलती है। वहीं, इनके वेतन में भी अन्य के मुकाबले कहीं ज्यादा अंतर होता है। यह बात हाल ही में की गई एक शोध में सामने आई है।
आईआईटी एनआईटी पहली पसंद
इंजीनियरंग की पढ़ाई करते समय छात्रों में कॉलेज और कोर्स को चुनने की बात सबसे पहले आती है। इनमें छात्रों के दिमाग में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT), भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) और कई अन्य शामिल होते हैं। हालांकि, छात्रों की पहली पसंद आईआईटी और एनआईटी ही होती है।
रोजगार की गारंटी नहीं
हालांकि, शोध में यह बात सामने आई है कि छात्रों का यह फैसला गलत भी हो सकता है। यह बात अब एक मिथक साबित होती दिख रही है कि आईआईटी में प्रवेश पा कर आपने अपना भविष्य सुरक्षित कर लिया है। अगर आप इंजीनियरिंग ब्रांच में सही ब्रांच में प्रवेश नहीं लेते हैं तो आपके लिए प्लेसमेंट प्राप्त करना काफी मुश्किल बात साबित हो सकती है। डेटा के मुताबिक देश के 13 आईआईटी में करीब 23 फीसदी छात्रों को प्लेसमेंट नहीं मिल पाया, जबकि इन सभी ने प्लेसमेंट के लिए अपना पंजीकरण कराया था। यह डाटा विशेष रूप से सिविल इंजीनियरिंग का हाल दिखाता है। साल 2020-21 में सिविल इंजीनियरिंग के लिए 10 इंजीनियरिंग कॉलेजों और कुल प्लेसमेंट के लिए 13 आईआईटी के डाटा का विश्लेषण कर के पता चला कि प्लेसमेंट के लिए पंजीकृत कुल छात्रों में से केवल 77 फीसदी को ही नौकरी मिल पाई थी। वहीं, दस आईआीटी के मामले में यह केवल 57 फीसदी ही रह गया।